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  • satyendraprakashsatyam 49w

    जल्दी

    जितनी जल्दी हो सके कर दो सुपुर्द - ए - खाक !
    क्या भरोसा आशिक का , कही देने लगे न आवाज !!

    ©satyendraprakashsatyam

  • satyendraprakashsatyam 50w

    उडान ️

    हमने परिंदों से ऊंची रखी है उडान ,
    और उससे भी ऊंची रखी है जुबान !
    बहुत दौर आए गम ए जिंदगी मे ,
    पर हमने गर्दिश मे भी ऊंची रखी है पहचान !!

    ©satyendraprakashsatyam

  • satyendraprakashsatyam 63w

    पीताम्बर️

    धरती फफक फफक कर रो पडी और रो पडा अंबर !
    कफन का रंग सफेद से हो गया पीताम्बर !!

    कोई फर्क नही रहा हिंदू और मुसलमान मे !
    दोनो साथ साथ दफन हो गए गंगा के मैदान मे !!

    सियासत कैसे बाट रही आपस मे इंसान !
    हिन्दू को शमशान मिला न और न मुस्लिम को कब्रिस्तान !!

    अपनो के इलाज मे बिक गया घर द्धार !
    सूरत भी देखने न मिली अपने प्रिय की अंतिम बार !!

    आज तो पत्थर भी रो पडा, जाग उठी मानवता !
    शायद आज फिर पड गई वोटो की आवश्यकता !!

    ✍️ सत्येन्द्र प्रकाश सत्यम
    ©satyendraprakashsatyam

  • satyendraprakashsatyam 102w

    वक्त आ गया

    कौन मर रहा है और कौन मर गया !
    हिसाब न रखने का अब वक्त आ गया !!

    अपनी तो मौज है कहाँ से कहाँ आ गया !
    जुमलो का कमाल है कि सर पे ताज आ गया !!

    जब तक सच निकलता घर से बाहर !
    तब तक झूठ दुनिया घूम कर आ गया !!

    सत्यम देखिए इंसाफ की नई नजीर !
    सच बोलना गुनाह है आज फैसला आ गया !!

    जिनके इंतजार मे थमी थी सांसे !
    न आ पाएंगे आज उनका भी जबाब आ गया !!

    वो सोचते थे फकीर है चला जाएगा झोला उठाकर !
    मुझे त़ो कुर्सी पर बैठना अब रास आ गया !!

    ©satyendraprakashsatyam

  • satyendraprakashsatyam 103w

    छीलती है मुझे

    छीलता हूँ प्याज तो ,
    रो पडता हूँ मै !
    और एक वो है जो ,
    हँस हँस रोज छीलती है मुझे !!



    ©satyendraprakashsatyam

  • satyendraprakashsatyam 103w

    रिंदाना


    रोज लगती है ,
    बज़्म ए रिंदाना !
    पुरखो की मिल्कियत है ,
    अपना क्या जाना !!

    अपने पास रखिये ,
    शराफत के मश्विरे !
    इतने अच्छे है तो ,
    यहां क्यो हुआ आना !!

    और वह जो कल कहते थे ,
    तौबा तौबा रिंदाना !
    लो देख लो आज फिर ,
    उनका हो गया बज्म मे आना !!


    शायर सत्येन्द्र प्रकाश सत्यम

    ©satyendraprakashsatyam

  • satyendraprakashsatyam 103w

    तकदीर


    कुछ तकदीर ने धोखा दिया कुछ हम भी बहक गए !
    मंजिल थी कोई और कही और पहुंच गए !!

    थोड़ा नही बहुत था खुद पर यकीन !
    पर न जाने क्यो टूटकर बिखर गए !!

    तुम तो आते नही अब ख्वाब मे भी !
    बनाकर बेनाम सा रिश्ता वो न जाने किधर गए !!

    लोग कहते थे हमे आशिक आवारा !
    जब से टूटा दिल , लोग कहते है हम सुधर गए !!

    ©satyendraprakashsatyam

  • satyendraprakashsatyam 103w

    जद️️

    खिलती हुई कलियों ,
    को न मसलो !
    चमन मे उदासी का ,
    आलम छा जाएगा !!

    मुडेर पर रखे चरागो ,
    को हवा मत दो !
    अधेरे की जद मे ,
    आपका घर भी आ जाएगा !!

    मैंने बेवफाई की या उसने ,
    अब रहने भी दो !
    जख्म कुरेदेगे तो सच ,
    जुबां पे आ जाएगा !!

    जुल्म होता है ,
    तो सहन करो !
    इंसाफ मागोगे तो ,
    पसीना आ जाएगा !!

    सही कहाँ आपने ,
    सरकार है अदालत है वकील है !
    पर इनसे मिलते मिलते ,
    बुढापा आ जाएगा !!

    अब वो साहबे हुकूमत है ,
    तुम्हारे लगोटिया यार नही !
    मिलना है तो जाकर मिलो ,
    क्या सोचते हो तुम्हारे बुलाने पर वह आ जाएगा !!


    शायर सत्येन्द्र प्रकाश सत्यम


    ©satyendraprakashsatyam

  • satyendraprakashsatyam 103w

    राहत इंदौरी

    लो मै आ गया तेरे शहर मे ,
    कुछ वक्त छाहँ लू वो शजर दे !!

    ऐ खुदा मुझे जन्नत मे जगह दे !
    यदि नही तो क्यों नही वजह दे !!

    शायर सत्येन्द्र प्रकाश सत्यम

    ©satyendraprakashsatyam

  • satyendraprakashsatyam 103w

    भारत

    वाह क्या खूब कारीगरी है ,
    क्या खूब सजाया !
    भारत है हम सभी का ,
    सभी ने इसे बनाया है !!


    शायर सत्येन्द्र प्रकाश सत्यम

    ©satyendraprakashsatyam