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  • shabir_ 107w

    है किसी बात का गुस्सा, बाहर निकाल
    घुट के मर जाएगा किस्सा, बाहर निकाल

    तुझे अंदर ही अंदर खा जाएगा एक दिन,
    अपने अंदर से मेरा हिस्सा, बाहर निकाल

    ~शाबीर
    ©shabir_

  • shabir_ 107w

    एक मतला दो शेर ����

    बसर - दृष्टि
    बे-बसर - दृष्टिहीन
    पिंदार - गर्व

    @hindiwriters @mirakeeworld @rekhta

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    ना किसी का घोंसला, ना मैं शजर ही बन सका
    मैं समुद्री रेत था, मुझसे न घर ही बन सका

    था अगर मैं ऐब तो, होती उमर है ऐब की,
    ना असर ही बन सका, ना बे-असर ही बन सका,

    सामने ही लुट गया, पिंदार मेरे इश्क़ का,
    ना बसर ही बन सका, ना बे-बसर ही बन सका

    ~शाबीर
    ©shabir_

  • shabir_ 107w

    रात गहरी कभी तारो की छांव में मिलो,
    तुम मुझसे कभी मेरे गांव में मिलो,

    बात दिल की यहाँ कहने में आसानी होती है,
    तुम मुझसे बनारस में मिलो, इस नाव में मिलो

    ~शाबीर
    ©shabir_

  • shabir_ 108w

    हमें इस ग़म के सहारे मत छोड़ो,
    ज़ख्म को मरहम के सहारे मत छोड़ो,

    तेरा लगाया हुआ पौधा तेरे बिन सूख जाएगा,
    हमें मौसम के सहारे मत छोड़ो

    ~शाबीर
    ©shabir_

  • shabir_ 108w

    मैं बुरी ख़बर था तो लौट आया,
    मैं बे-असर था तो लौट आया,

    नज़र लग गयी थी ज़िन्दगी में उसके,
    मैं बुरी नज़र था तो लौट आया,

    पहली पसंद हूँ या आखिरी ख्वाहिश?
    कुछ नहीं का डर था तो लौट आया,

    दिल लग गया था उस एक घर से,
    किसी और का घर था तो लौट आया,

    बदल भी सकती थी ये कहानी,
    मैं बे-सबर था तो लौट आया,

    ~शाबीर
    ©shabir_

  • shabir_ 109w

    " ग़म ग़म लगे सरखुशी न लगे,
    उसे मुझ जैसी ख़ामोशी न लगे,

    उसकी कसम तोड़ कर मैं जा नहीं सकता,
    मेरी मौत उसे हादिसा लगे, खुदखुशी न लगे "

    ~शाबीर
    ©shabir_

  • shabir_ 110w

    फ़र्द =इंसान
    मुब्तिलाए =फँसा हुआ
    दस्तार = पगड़ी

    एक मतला दो शेर ����
    मोहब्बत से नवाज़ें ����


    @hindiwriters @mirakee @writersnetwork

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    " फ़र्द से फ़र्द के ही सताए हुए,
    क्या यही हैं ख़ुदा के बनाए हुए,

    मज़हबी मज़हबी मज़हबी कर रहे,
    ज़हनी बीमार हैं मुब्तिलाए हुए,

    मायने हैं बताते ये दस्तार के,
    औरतों पे हैं जो जुल्म ढाए हुए "

    ~शाबीर
    ©shabir_

  • shabir_ 111w

    ग़ज़ल ������
    आप सब से मोहब्बत की उम्मीद ....

    @hindiwriters @mirakeeworld @rekhta

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    " हादिसों से बच रहा था हादिसों में फँस गया,
    मैं नशे से बच रहा था मयकशों में फँस गया,

    इक तरफ़ क़ाफ़िर खड़ा था इक तरफ़ में था ख़ुदा,
    छोड़ कर मज़हब का चोला आशिकों में फँस गया,

    अलविदा कहना था मुझको, पिंज़रा भी था खुला,
    सब परिन्दे उड़ गए मैं कायदों में फँस गया,

    दब गए तहरीर मेरे दी गई बातें बदल,
    ख़त मिरा तो बे-जुबां था साजिशों में फँस गया,

    आप पहले आप पहले करते-करते रह गए,
    हो गए शायर सभी मैं ख़िदमतों में फँस गया,

    ~शाबीर
    ©shabir_

  • shabir_ 112w

    क़मर -चाँद
    निगहबानी - देखरेख

    एक मतला एक शेर पेश है, मोहब्बत की उम्मीद में...

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    "वो अपनी हर ग़ज़ल पर बारीश सा असर रखते हैं,
    मैं ढूँढू फ़लक़ पर वो पल्लू पे क़मर रखते हैं,

    निगहबानी तो नहीं इश्क़ में जिस्म पर निशां देना,
    उनसे मिल आऊं, लोग गर्दन पर नज़र रखते हैं "

    ~शाबीर
    ©shabir_

  • shabir_ 112w

    " एक तस्वीर बनाता जा रहा हूँ,
    उसे कपड़े पहनाता जा रहा हूँ,

    कहीं आँख मेरी ठहरी हुई है,
    अब मैं मुस्कुराता जा रहा हूँ,

    अब वो पलकें झुका रही है,
    मैं रंगों से सताता जा रहा हूँ,

    ये पढ़कर वो सिहर रही है,
    और मैं कोंची घुमाता जा रहा हूँ

    वो मेरे रंग में रंगते जा रही है,
    और मैं रंग चढ़ाता जा रहा हूँ "

    ~शाबीर
    ©shabir_