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  • shagunsingh08 8w

    छोड़ दिया था लिखना
    क्योंकि बोलने का सहारा मिल गया था
    छोड़ दिया तो खुद को
    क्योंकि हाथ में फोन और
    कभी कभी किताबों का बोझ मिल गया था

    सबके पढ़ने के तरीके को देखकर
    थोड़ी कंफ्यूज थी मैं
    औरअपने को लेकर थोड़ी ज्यादा
    ही uncertain थी मैं

    खुदको कहीं बांध कर रख दिया था
    अपनी सोशल मीडिया वाली
    जिंदगी को कहीं खुदसे दूर कर दिया था

    रात में सोने तो जगने से पहले
    अपने दोस्तों के कमरों की बत्तियों को झांकना
    तो सुबह जल्दी उठकर
    बस अपने दोस्तों से आगे निकलने का इरादा बनाना

    सबकी मास्टर स्ट्रेटजी को अपनाकर
    खुद का पोटेंशियल ही भूल गई थी
    क्या करूं यार
    मैं भी इस कच्ची उम्र में इस कॉम्पिटेटिव एनवायरनमेंट
    मे इसका हिस्सा बनकर
    कही गुम सी हो गई थी. .
    ©shagunsingh08

  • shagunsingh08 20w

    Thnku god....

    On the day of my birthday
    I am holding back
    the memories in my mind..
    Instead of revising those so called
    Repetative formulas in my mind
    Smewhere in
    deep lonely night...

    Thanking to god
    For all that he has
    Given to me. ..
    From overcoming my shyness nature
    To becoming the captain
    Of my team....

    Giving me the courage
    To hold and fight
    With the adverse situations
    In my life...
    For giving me
    such understandable grtfull pa,
    Cool and smiling mum.,
    Bold ,all rounder didi
    And ya a little bit sharp minded brother.।।

    Thnks for giving me such
    An amazing teachers,
    Books, frnds, prsn, strangers
    And .....
    a place for me
    For my existence,...

    I planted one plant everyear
    But today I'll try to plant a
    Couragies, calmfull,
    Determined, cautious,
    Strond version seed
    Somewhere within me
    And dig it in
    my hopefull soul..

    Thanku for giving
    Me such a uncertain, adventurous,
    pleasent life...

    I hope u (god) will always
    There for me
    Giving me the sensational
    Signal of recovering back
    even when
    I am out of coverage area....
    ©shagunsingh08
    08/02/22

  • shagunsingh08 26w

    आज यूं ही कलम को चलने दो
    अपने अंदर
    भरी बातें जज्बातों
    को इन पन्नों पर लिखने दो

    थकान ,दर्द ,मजे भरी जिंदगी में
    एक कोना खुद के लिए
    भी बचा कर रखो तुम

    लोगों से मिले, अकेले भी रहो
    पर कुछ भी हो कभी भी
    खुद से मत डरो ...

    खुद को कोसो नही
    खुद पर गुस्सा मत करो
    खुद को बताओ खुद की गलतियां
    खुद की खुद के लिए अहमियत बढ़ाओ
    तो खुद से रोज हसीन
    मुस्कुराहट के साथ खुद से मिलवाओ..


    बांटो खुद से बातें
    मैं तुम्हे लिखने ,पढ़ने ,सुनने
    के लिए बेकरार हूं
    तुम्हारी हर बेतुकी बात , गुस्सा ,दर्द,
    हंसी को तुम्हारे साथ बांटने के लिए
    हमेशा तैयार हूं

    बहने दो खुद को
    स्थिर मत हो
    रहने दो खुद
    को कुछ पल
    खुद के साथ
    आखिर मोबाइल को भी
    कभी सुकून से जीने दो !

    खुद को जानो ,समझो
    खुद की परछाइयों से मिलो
    पीछा करो उसका
    ढूढो उन में खुद को
    और कुछ इस तरह
    अपने वजूद की पहचान करो
    तो खुद के होने का
    खुद को एहसास दिलाओ...

    आगे बढ़ो, फेल हो ,
    गिरो उठो , भागों
    पर इस रेस की शुरुवात
    कभी भी फेल होने के
    डर के साथ मत करो........
    ©shagunsingh08

  • shagunsingh08 42w

    Kakadeo

    ठहरो !
    कहां हो तुम?
    बच्चों की मंडी में खो गए हो क्या?
    लगता है नए हो...
    खुद का पता तो
    मालूम है ना तुम्हें?

    हर जगह
    बच्चों से भरी पड़ी है
    ये पढ़ाई वाली मंडी है

    पढ़ लो वरना
    कोई पूछने वाला नहीं है....

    सवाल लग गया
    तो खुशी
    और अगर तुम से पहले
    किसी और का लग गया
    तो भी अंदर से
    सेल्फ डाउट !

    कॉन्फिडेंस ?
    कॉन्फिडेंस का तो पता नहीं

    खुद को हम बस
    मानो एक कोहरे से
    ढके रास्तों पर
    चलते हुए मालूम देते
    है!

    कोहरे की धुंध लेपन को देखकर
    अगर रुक गए
    तो कोहरा हटते ही सब तुम से आगे

    और अगर उस कोहरे
    में चल भी रहे हो
    तो आगे के रास्ते का डर!

    लेट हो !
    स्लो हो !
    फास्ट हो!

    पता नहीं
    पर अभी तो
    रोज खुद को आईने में देखते है,
    थोड़ा सा रुक के
    ध्यान से
    बस अपनी शक्ल को देखते हैं
    कोशिश करते हैं
    खुद को पहचानने की !!

    माना कि लेट है
    पर
    इन हेक्टिक दिनों में
    बस खुद को
    किसी तरह मैनेज करना सीख रहे हैं

    बाकी हम भी
    उसी कोहरे से ढकी हुई सड़कों पर अभी चलना सीख रहे ..
    ©shagunsingh08

  • shagunsingh08 62w

    Physical beauty based attachment
    Gave u a false misleading criteria
    Without knowing about her one sided idea....
    ©shagunsingh08

  • shagunsingh08 66w

    Satish dhawan sir.....

    नंबरो के इस रोमांचक खेल
    सुडोकू से मिलवाया उन्होंने
    पहली दफा किताबो से
    हट कर
    अंदर पडी खामोशी को
    कागज पर लिखकर
    इस जाल से बाहर निकलने
    का रास्ता दिखाया उन्होंने

    उनके सिंप्लिसिटी ने
    जिंदगी जीने का एक रुख सिखाया मुझे
    तो कभी
    बिन जोक वाली बातो पर भी हँसना
    सिखाया मुझे

    मैं उन्ही बच्चों में से एक थी
    जो समय और परिस्थितियों के चक्रव्यूह
    से परेशान थी
    भरी क्लास में सभी टीचरो से
    अंजान थी
    सबकी अजीबो गरीब हरकतों से
    परेशान थी
    खुद के ही वजूद से ही
    अंजान थी

    लेकिन फिर भी सर ने
    खुद से पहचान कराने का
    अहसास जाने अंजाने में
    करवाया मुझे
    तो
    साधारण तरीके से
    रहना का सालीका सिखाया मुझे
    बस यूँ ही
    बातों को लिखने के सहारे
    खुद को संभलना सिखाया उन्होंने....
    ©shagunsingh08

  • shagunsingh08 67w

    उन बीते लम्हों को भुलाने दो
    चलो अब उस छत के पास
    खुद को खुले आसमान और
    एकातंता से ही मिलाने दो

    ख्वाहिशो की इस मंज़र पर
    खुशियो को अपना बनाने दो
    दो पल के लिए ही सही
    खुद को एकांत ठिकाने का
    पता लगाने दो
    ©shagunsinghrajput

  • shagunsingh08 70w

    खुद की काबिलियत पर
    ना ही नाज है ना ही पहचान है
    जिंदगी की इस चलती बस मे
    हम बैठकर यूँ ही सवार है
    ©shagunsingh08

  • shagunsingh08 71w

    अपने अंदर भरी बातो को
    यूँ ही जाने न दो
    सामने पडी किताबों को हटाकर
    कुछ पल खुद को खुद से
    यूँ ही मिलाने दो
    स्याही की तरह बातों को
    यूँ ही बोलो तुम
    बंद पडी पुरानी किताबों को
    छोड़
    खुद की जिदंगी के बंद पडी किताबों
    से मिलाने दो
    यूँ ही अपने अंदर पडे जज्बातो
    को तुम खुद को ही बताने दो
    खुद की तारीफ में
    यूँ ही कुछ शब्द
    खुद को बताने दो
    टकटकी नज़रो से
    शान्ति से खुद को
    झाँको तुम
    अपने अंदर पडी बातों को
    कभी कभी
    दूसरो से भी बांटो तुम!!!!
    ©shagunsingh08

  • shagunsingh08 71w

    हम आज कल के बच्चे
    ना किसी के घर आना ना ही जाना
    खुद को बस चार दीवारी
    मे बंद करके रखना
    लोगो से ना ही मिलना
    # social होने के टैग
    से मिलो दूर होना
    खुद के इस लोनेलिनेस
    को हर बार
    अपना सोलिट्यूड कहके
    खुद को गलत ठहराना
    ना किसी फंक्शन मे जाना
    ना ही घर के बाहर निकलना
    बस अपने अंदर पडे खोखलेपन
    को पूरा करने के लिए मोबाइल चलाना
    उफ़ हम आज कल के बच्चे
    और बस
    रिटर्न गिफ्ट मे घबराहट तनाव
    निगेटिविटी
    ही पाना।

    ©shagunsinghrajput