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  • shayar_tera 29w

    क्या भरोसा रह गया होगा उसे मुझपर,
    मैं यूँही बातें बना रहा दिन-रात आजकल।

    सच बोलते हुए तो कितने वक़्त निकल गए,
    मैं कैसे कह दूँ किन हालातों से गुजरा रहा आजकल।

    इंतजार करते हुए ही आँखें लग जाती हैं,
    मैं तो ढंग से सो तक नहीं रहा आजकल।

    ज़रा अपने पक्के इरादे तो बता दो मुझको,
    मैं शहर बदलने का सोच रहा आजकल।


    ©shayar_tera

  • shayar_tera 29w

    उसे ना जाने क्यों अलविदा कह दिया,
    वेवजह सपनों से भी जुदा कर दिया।

    सच्चाई कहता भी तो कैसे उसको,
    दूरियों ने जो बेबस कर दिया।

    हालातों के कारण घुटने टेके हैं,
    वक़्त ने जो बेदर्द कर दिया।

    आँखों में झांकना मुश्किल हैं,
    अब तो कुछ कहना भी मुहाल कर दिया।


    ©shayar_tera

  • shayar_tera 30w

    बस बोल कर रह जाता हूँ,
    मालूम नहीं और ज़िन्दगी से क्या चाह रहा हूँ।

    अब ये ज़िन्दगी का बोझ मुझसे नहीं संभल रहा,
    मालूम नहीं मैं क्यों अपनी परेशानी रोज बढ़ा रहा हूँ।

    मेरे होने ना होने से फर्क कुछ लोगो को पड़ता हैं,
    मालूम नहीं आजकल ख़ालीपन में क्या से क्या सोचे जा रहा हूँ।

    देखते है ये वक़्त कब ढलता मेरे हक में,
    मालूम नहीं ऐसे ही क्यों ज़िंदा रहे जा रहा हूँ।

    ©shayar_tera

  • shayar_tera 30w

    थोड़ा ऐब किसमे नहीं होता,
    पर यकीनन कभी ऐसा रवैया तो मुझसे नहीं होगा।

    मैं भूल कर वो वक़्त बीता लूँगा,
    पर यकीनन तुझे भूलना मुझसे नहीं होगा।

    आजकल तुम अपना वक़्त कैसे गुजार रहे,
    पर यक़ीनन ये वक़्त का सब्र मुझसे नहीं होगा।

    वो अल्फ़ाज़ आज भी गूँजते हैं मेरे कानों में,
    पर यकीनन तुम्हें उम्मीद देना तो मुझसे नहीं होगा।


    ©shayar_tera

  • shayar_tera 30w

    वो अपने दर्द को बयां नहीं कर सकता,
    पर ऐसे मोह्हबत तो कोई निभा भी नहीं सकता।

    तेरी खुशियों के आगे कुछ देखा नहीं मैंने,
    पर दूर बैठ कर मिलने के सपने तुझे दिखा भी नहीं सकता।

    हक में कोई फैसला नहीं हुआ अभी तक,
    पर दूरियों को पल में ऐसे घटा भी नहीं सकता।

    सारे जज्बात रखे के रखे रह गए मेरे,
    पर अब ख़्याल बदल गया तो तुझे बता भी नहीं सकता।

    जानता हूँ तेरा हाल आजकल मुसल्सल बिगड़ रहा,
    पर हक़ीक़त में तेरे करीब मैं अभी आ भी नहीं सकता।


    ©shayar_tera

  • shayar_tera 31w

    एक उम्मीद की किरण थोड़ी जागी थीं,
    कि गाँव से शहरों की तरफ दुनिया फिर भागी थी।

    वक़्त का पहलू ज़रा झुका ही था हक में,
    ना जाने फिर कैसे ये सितम दुनिया में छाई थी।

    कितनों के अपने बिछड़ गए इस पल में,
    ना जाने कैसे डर कर लोगों ने अबतक वक़्त घरों में गुजारी थी।

    अब हर शख्स बस एक ही दुआ करता दिखता हैं,
    जोड़ें हुए पैसे ले लो सारी पर सुकून की ज़िंदगी लौटा दो हमारी।




    ©shayar_tera

  • shayar_tera 31w

    यकीन हैं मुझे वक़्त पर,
    एक दिन मुझे मेरा वक़्त जरूर दिखाएगा।

    क्या अजीब काम आया हैं रात में,
    अब लगता हैं ये रात को भी दिन बनाएगा।

    अभी आँख भर कर सोया भी नहीं था,
    कि फिर वही डर से जीवन रूबरू करवाएगा।

    कैसे मान लू कि इस वक़्त कब क्या होगा,
    लगता हैं लिखी हुई बातों को सृष्टि फिर दोहराएगा।


    ©shayar_tera

  • shayar_tera 31w

    हर सुबह कुछ ऐसा होता हैं,
    जिससे लड़ना नहीं उससे लड़ना होता हैं।

    ये वक़्त जिस गति से ढल रहा हैं,
    जिसे मेरा नहीं होना वो बेगाना होता हैं।

    चलो ये नफरत की दीवार तोड़ देते हैं,
    जिससे बातें नहीं होती उससे बात कर लेते हैं।

    बहुत कमज़र्फ हैं ये ज़माना आज मैंने जाना,
    वक़्त इतना लेकर भी इज़्ज़त कम कर देते हैं।


    ©shayar_tera

  • shayar_tera 33w

    मोहब्बत जो मैं बया कर आया उससे,
    फिर न ख़्याल,न कोई सवाल करने आया मुझसे।

    ये कैसी हकीकत से रिश्ता जोड़ा मैंने,
    रुठ करके भी वो सवाल न कर पाया मुझसे।

    चलो मान लेते ये खुदगर्ज दुनिया हैं,
    पर उसके दिल ने हमेशा वही सवाल किया मुझसे।

    अब जाकर उसने पूछना छोड़ा हैं,
    समझ गया उसने अलविदा अपने अन्दाज़ में कहा हैं मुझसे।


    ©shayar_tera

  • shayar_tera 33w

    ऐसे हाल पर छोड़ देने पर किसको हाँ कहूँ,
    जो हर बात पर झूठी हाँ कहता उसको प्यार कहूँ?

    सुला कर उसे कंधे पर मैं ना सोया पूरी रात,
    सुबह आँख मलते देखकर पूछा उसने कैसी कटी रात?

    हर वो शख्स मुझे बेगाना लगता हैं,
    क्यों वो किस्सा पुराना लगता है?

    मेरी चाहत पर उसका हँसना लाजमी हैं,
    क्यों वो प्यार निभाना होता हैं?

    जरूरत पर मुझे मेरे नाम से पुकारती हैं,
    क्यों उसे मुझतक ही आना होता हैं?

    चलो वो प्यार भूला देते हैं,
    क्यों ऐसे याद मिटाना होता हैं?


    ©shayar_tera