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  • shayarana_girl 16h

    कासिद मेरी मुराद तू पासबान तक पहुंचा दे,,
    कैफियत मेरे दिल की जरा उसे जाके सुना दे।।।

    ©shayarana_girl

  • shayarana_girl 1d

    जब मै तुझपे आने वाले गजल का ख्याल लिखूंगी...
    तुझपे प्रेम आने के अनगिनत सवाल लिखूंगी...

    तेरी प्यारी सी मुस्कान को गुलाल लिखूंगी..
    तेरे बिन अपनी जिंदगी के होने पर सवाल लिखूंगी..

    तेरे गुस्से को अपने लिए देखभाल लिखूंगी...
    तेरे रूठ जाने पर खुद का हाल बेहाल लिखूंगी...

    तेरी आंखो को प्यार सा चौपाल लिखूंगी..
    तेरे स्पर्श पर अपना भविष्य काल लिखूंगी...

    लिखूंगी तेरे संग अपना अनंतकाल लिखूंगी..
    तेरे बिन अपना इस जनम में इंतकाल लिखूंगी...।।

    मै बनकर विक्रम तुझको अपना बेताल लिखूंगी...
    खिलकर के सुंदर पौधे सा तुझे मृणाल लिखूंगी...

    लिखूंगी तुझ से ही अपना वर्तमान काल लिखूंगी..
    तुझपे प्रेम आने के अनगिनत सवाल लिखूंगी....।।



    ©shayarana_girl

  • shayarana_girl 2d

    प्रेम कहां कहां मिलता है...।

    मुझे मिलता है प्रेम..विज्ञान
    के अलग अलग हिस्सों में.
    कभी फिजिक्स के सेक्शन..
    तो कभी केमिस्ट्री के बक्सो मे..

    कहीं ऑर्गेनिक केमिस्ट्री की रिएक्शन में..
    तो कभी फिजिकल इंटरप्रेटेशन के सेक्शन में..
    कभी गणित के अजीबो गरीब फ्रेक्शन में..
    तो कभी इंटीग्रेशन के ताबड़तोड़ एक्शन में..।।

    कभी बन्द होजाता है किसी वेसल के अंदर..
    कभी फैल जाता है जैसे हो कोई सिकंदर...
    कभी रिएक्ट होता है खुद के जैसे कंपाउंड से..
    कभी बना लेता बोंड अपने फोरग्रांउड से..।

    कभी टू डी तो कभी थ्री डी दिखता..
    कभी सुडो वेक्टर की तरह हर जगह निखरता..
    कभी प्रूफ करता है जैसे हो सीधा साधा डेरिवेशन...
    कभी करता है डिवाइड जैसे हो कोई टेडा मेडा डिवीजन...।

    तो बस यहीं कुछ जगह है जहां मुझे
    दिखता और मिलता है प्रेम..।

  • shayarana_girl 2d

    मिराकी का दौर..
    रिश्तों को आलम था...
    आपसब से मिलना ही शायद...
    मेरी ज़िन्दगी के होने का सबसे...
    बड़ा कारण था...।।

    ©shayarana_girl

  • shayarana_girl 3d

    आपने अक्सर बेड कंडक्टर ऑफ़ हीट के बारे में सुना होगा,,
    पर क्या कभी आपने बेड कंडक्टर ऑफ़ लव सुना है?
    सोचा है कभी जैसे निर्जीव वस्तुओ में बेड कंडक्टर ऑफ़ हीट होता ठीक उसी तरह सजीव वस्तुओ में होता है बेड कंडक्टर ऑफ़ लव...
    जो कितनी भी इंटेंसिटी से प्रेम आ रहा हो उसके पास उसको खुद से गुजरने नहीं देता।।
    ठीक उसी तरह शायद जिनसे बेपनाह प्रेम है मुझे उनका दिल लवप्रूफ होगा या शायद बेड कंडक्टर....तभी तो मेरे अंदर से निकलते हुए अत्यधिक और अटूट प्रेम से भी उन्हे कोई फर्क नहीं पड़ता।।

    माना मेरे पास कोई सबूत नहीं मेरे प्रेम का ....
    माना कोई मीडियम नहीं हीट फ्लो करने का...
    पर क्या इतने बरसो से तुझे और सिर्फ तुझे ही चाहना काफी नहीं हमारे एक हो जाने के लिए,,
    क्या हम जैसे रेडियेशन में हीट फ्लो होती बिना किसी मीडियम के.. उस तरह प्रेम को ट्रांसफर नहीं कर सकते...।
    क्या जरूरी है मेरा तेरे लिए कोई गवाह को लेके आना।।
    क्या जरूरी है मेरा शिव जी के प्रेम में सती हो जाना...
    क्या जरूरी है मेरा अपने प्रेम को सिद्ध करने की दीवार में चुन जाना....
    क्यों नहीं समझते तुम.....बेपनाह इश्क़ करते है तुमसे...
    इतना शायद कई जनम लेने पड़ेंगे तुम्हे किसी से प्रेम करने के लिए जितना मैंने इसी जनम में तिमसे किया है...।।

    खैर.....शायद जैसे बेड कंडक्टर को गुड़ नहीं बनाया जा सकता...ठीक उसी तरह तुझे इस जनम मे तो मेरे प्रेम का महत्व नहीं समझाया जा सकता।।।

    -)अनुष्का

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    मै लौ सी जलना चाहती हूं तुम्हारे
    प्रेम में तुम ऑक्सीजन बन जाओ न...
    और कर रही हूं फ्लो आज अपने इश्क़
    का तुम कंड्क्शन सा बन जाओ न।।
    (अनुशीर्षक पढ़े)
    ©shayarana_girl

  • shayarana_girl 4d

    क्या कहा..?
    हिचकियां परेशान करती हैं तुम्हे...।

    तो हमने तो पहले ही कहा था...
    सीधा सीधा मान जाओ हमारे प्रेम प्रपोजल को..।

    (विराट सा मेरा दिल, बस विराट की बातें करता है,,)

    ©shayarana_girl

  • shayarana_girl 1w

    जहां हो,,(तुम और हमारा मिलन)
    जहां हो (मै और मेरे प्यार का गिलन)
    जहां हो..(मेरे शब्दों से तुम्हारा परिमिलन)
    बस वहीं है मेरे लिए
    काशी,अयोध्या,और मथुरा का संगम ।

    जहां हो,,(प्रेम में बंधे रहने का अटूट कारण)
    जहां हो (राधा और कृष्ण के प्रेम का उच्चारण)
    जहां हो (सबरी के मन में राम नाम का मंत्रोच्चारण)
    बस वहीं है मेरे लिए
    काशी,अयोध्या और मथुरा का संगम।।

    जहां हो,,(तुम और मै एक संग)
    जहां हो (चारो ओर फैले हुए प्रेम के रंग)
    जहां हो (प्रेम को जीवित रखने के लिए जंग)
    बस वहीं है मेरे लिए
    काशी,अयोध्या और मथुरा का संगम।।

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    बस वही है मेरे लिए
    काशी, अयोध्या और मथुरा का संगम...।
    (अनुशीर्षक पढ़े)
    ©shayarana_girl

  • shayarana_girl 1w

    जब जब मिलती हूं तुझसे.. तुझमें रहे जाती हूं...।


    भोर के समय खिलते हुए पुष्प सी खिल जाती हूं...
    कभी तेरी आंखो मे तो कभी ख़यालो में खो जाती हूं..
    दिलचस्पी नहीं वैसे तो मुझसे मिलने में तुझे,,
    पर देखती हूं तुझे तो देखती रही जाती हूं...
    कुछ कहती नहीं लेकिन बहुत कुछ कह जाती हूं
    जब भी मिलती हूं तुझसे..तुझमें रह जाती हूं...।

    सजदा तेरे नाम का मंदिर में कर आती हूं..
    तेरे नाम का धागा बांधने मस्जिदों पर जाती हूं...
    माना कभी मिलती हूं रास्ते पर तब बात नहीं होती..
    पर तेरी एक आवाज़ सुनने को मै तरस जाती हूं...
    हर बार तेरे प्रेम के समंदर में,,मैं नदी सी बह जाती हूँ,
    जब भी मिलती हूं तुझसे..तुझमें रह जाती हूं।।

    कभी भटकती हूं..तो कभी तुझे लेके दृढ़ हो जाती है..
    कभी जागती रहती हूं और तुझमें मुग्ध हो जाती हूं...
    रहती नहीं यूं तो सदा के लिए ही यादों की गठरी...
    पर तुझसे मिलने रोज सपनो की गहराई में जाती हूं...
    माना तेरी यादों को बिन बोले सह जाती हूं....
    जब भी मिलती हूं तुझसे..तुझमें रह जाती हूं।।...




    ©shayarana_girl

  • shayarana_girl 1w

    तो तुम सीधे सीधे करते हो मुझसे प्यार का इज़हार,,
    या तांत्रिक बाबा से कह के
    तुमपे मेरे प्यार का जादू करवाऊ।

    ©shayarana_girl

  • shayarana_girl 1w

    बीते दिनों ना जाने कैसा हाल हो रहा...
    मतलब बताने को बहुत कुछ है मेरे अंदर,,
    गम की बहुत सारी पोटली है जिसे मै खोलना चाहती हूं,,
    बहुत सारे दबे एहसास है मेरे अंदर जिन्हें बिखेर कर मै खुद को समेटना और सुलझाना चाहती हूं।।

    पर जितनी भी बार कोशिश करती हूं
    कुछ भी कहने की ,जितनी बार कोशिश करती हूं अपने अंदर दफन किस्सों को बता के मिटाने की बस तब तब मेरी ये जुबान शांत हो जाती है,,
    मानो बात गले तक आयी हो और फिर वापस चली गई,,
    मानो कोई सुनना चाह रहा था मुझे पर मेरे होठ वो तो मेरे अंदर के पागलपन ने पहले ही सिल दिए थे.....।।
    और बस फिर मै एक असहाय इंसान की तरह
    किसी कमरे में खुद को बन्द करके,, लिख के अपने विचारो को समेटने लगती हूं,,,और बन जाती हूं एक जीती जागती लाश की तरह।।
    जो ना किसी से कुछ सुनने को तैयार और ना ही कुछ किसी को बताने के लिए,,उसे पसंद आ रहा तो बस अपनी तन्हाई के साथ रहना।। या यूं कहे वो बात जो वो बताना चाह रही शायद अभी उस खुद भी समझने में थोड़ा समय लगेगा। शायद इतना समय जितना लग जाता है एक समुद्र को सूखने में,,शायद उतना समय जितना लग जाता है एक तारे को मरने के बाद अपनी जगह से हटने में...और तब तक वो यूं ही पन्नों पर अपने लफ़्ज़ों को बिखेरती रहेगी और करती रहेगी दफन एक के ऊपर एक ..........बात.......को।।

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    कि रखती नहीं सर सब मै मा की गोद में,,
    डर है मुझे मेरी आंखो के छलक जाने का।।
    (Read Caption)
    ©shayarana_girl