shivi_18

Shivisha soni self lover ����

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Reposts
  • shivi_18 33w

    लोग बहुत आसानी से कह देते हैं...बस 1 मिनट रुको.....
    जरा गौर से तो देखिए.... उस 1 मिनट का फासला कितना है...
    11:59 = 2021
    12:00 = 2022
    ©shivi_18

  • shivi_18 36w

    वक़्त है,कि रेत है.....
    फिसलता जा रहा है.....
    हर इंसान वक़्त के साथ बदलता जा रहा है.....
    ©shivi_18

  • shivi_18 36w

    ��

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    अब क्या ही कहूं..... मैं खुदके बारे में।
    गुजरते हुए इस वक्त के साथ,
    खुद से ही अनजान हुए जा रहे हैं हम।।
    ©shivi_18

  • shivi_18 51w

    चाय ☕

    जिससे शुरू होती है हर इंसान की सुबह,
    और जिसपे खत्म होती है हर इंसान की शाम,
    मेरी ये रचना चाय की मीठी चुस्कियों के नाम.....

    बस एक प्याली चाय से ही,
    चुटकियों में दूर होती दिन भर की थकान.....
    कुछ लोग होते हैं इसके इतने दीवाने,
    कि बिना इसके नहीं शुरू कर पाते कोई काम.....
    रात में कोई विद्यार्थी जब लड़ता है अपनी नींद से,
    तब चाय ही लगाती है : उसकी नींद पे पूर्णविराम.......
    गले में हो खराश या फिर हो तेज जुकाम,
    चाय पीने से मिल जाता है, पल-भर में आराम....
    समाए हुए हैं इतने गुण इसमें, आती है ये इतने काम,
    तभी तो हर भारतीय की जुबां पर,
    रहता है बस चाय का नाम......
    ©shivi_18

  • shivi_18 57w

    Written by my favorite teacher- Dr. gitendra singh
    ������

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    कुछ सरहदें मन की भी हैं,
    कुछ मजबूरियां हालात की भी हैं,
    कुछ बेड़ियां समय की भी हैं.......
    दूर क्षितिज की और कुछ रोशनी भी है,
    सपनों की उड़ान बाकी अभी भी है.......
    तोड़ दे उन बेड़ियों को,
    जो तेरे कदमों को रोकती है....
    छोड़ दे उन बेबसियों को,
    जो तुझे सोचने से रोकती हैं......
    उड़ चल, आगे बढ़ लगातार,
    इस बार चल, चलें शिखर के पार......

  • shivi_18 57w

    उम्र चाहे कितनी ही ज्यादा क्यों ना हो,
    बीमार और परेशान होने पर सुकून तो मां की गोदी में ही मिलता है.........
    ©shivi_18

  • shivi_18 57w

    महादेव

    दुखी जनों के कष्टों का करते महादेव अंत,
    वो ही सबके भाग्य विधाता, वो ही आदि अनंत
    ©shivi_18

  • shivi_18 57w

    मेरी ख्वाहिश

    मेरी ये ख्वाहिश नहीं कि
    तुम्हारे साथ बड़े-बड़े शहरों में घूमने जाऊं....
    मेरी ये ख्वाहिश नहीं कि
    तुम्हारे साथ खड़े होकर आइसक्रीम खाऊऺ...
    मेरी ये ख्वाहिश नहीं कि
    हर हफ्ते तुम्हारे साथ सिनेमा हाल जाऊं.....
    बल्कि, इस उन्नीसवीं सदी की लडकी की बस यही ख्वाहिश है कि.....
    जब भी कभी मैं परेशान हो जाऊं ....
    तो तेरा ही साथ पाऊं.......
    मैं हूं ना तुम्हारे साथ......
    तुम्हारे कहे हुए लफ्जों में,
    बस यही अल्फ़ाज़ पाऊं..........
    ©shivi_18

  • shivi_18 57w

    जितनी कम उम्मीद रखोगे दूसरों से,
    उतना ही कम दर्द होगा दिल टूटने से।
    ©aka_ra_143


    जब कोई उम्मीद ही नहीं होगी किसी से,
    तो इस दिल का टूटना कैसा...........
    ©shivi_18

  • shivi_18 58w

    ज्यादा मत सोचो शिवी,
    अपने हालातों से लड़ना सीखो....
    हर वक़्त नहीं होगा कोई तुम्हारा दर्द बांटने के लिए,,
    बेहतर यही है की तुम खुद से ही संभलना सीखो........
    ©shivi_18