shreya_seth

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Reposts
  • shreya_seth 1w

    बच्चे पेड़ है , तो मां उसकी जड़ है।
    मां फूल है, तो बच्चे उसकी सुगंध है।
    बच्चे की सुखद काया है तो,
    मां पेड़ की छाया है।

  • shreya_seth 6w

    देखा है मैंने, लोगो को इश्क में तबाह होते हुए,
    हां देखा है, इश्क़बाज़ो को इसी तबाही का गवाह बने हुए।
    ©shreya_seth

  • shreya_seth 7w

    हां इसी आसमां के छावं में,
    कुछ सासें सुकुं के भरलू।
    तुम उन तारो को देखते रहो,
    मै अपने चांद का दीदार करलू।
    इन आंखों से कुछ कहते हुए,
    इस गुलाबी शमा में खोते हुए।
    एक बहाना कोई तलाश करलु,
    जो दूरियां दर्मियां है हमारी,
    इनको ज़रा कम करलु।
    अब जो इतने पास हो तुम,
    तो कह दू कितने खास हो तुम,
    तुम पढ़ना मेरी कविता को ,
    इसी आसमां की छावं में,
    एक ख्वाब देखा है मैने,
    इसी आसमां की छांव में।
    ©shreya_seth

  • shreya_seth 9w

    #life @writersnetwork #pod
    (it won't affect my life)

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    can we skip the good part!

    from my life !
    yes you can skip the good part from my life it just like 15 seconds youtube ad. with skip option.
    ©shreya_seth

  • shreya_seth 9w

    फर्क पड़ता है,

    .
    शादी करदो इसकी, गुड़िया 20 की हो गई है,
    शादी करदो इसकी,क्योंकि 91 वर्षीय आजी मरने से पहले दामाद देखना चाहती है,
    शादी करदो इसकी, गुड़िया की पढ़ाई थोड़े ही रुकेगी,
    शादी करदो इसकी, 2 बिटिया और भी तो है।
    शादी करदो इसकी।
    शादी करदो इसकी, लड़के वाले जादा डिमांड नहीं कर रहे।
    शादी करदो इसकी, एक चारपहिया ही ना मांगे है आखिर लड़का सरकारी क्लर्क है,
    शादी करदो इसकी, ऐसा रिश्ता बार बार थोड़े ही आता है,
    शादी करदो इसकी
    शादी करदो इसकी, जमाना बड़ा खराब है, इज्जत से गुड़िया की डोली उठ जाए,
    शादी करदो इसकी , देखा नहीं परसो मिश्रायीन की लड़की भाग गई,
    शादी करदो इसकी ,वरना बढ़ती उम्र में रिश्ते अच्छे ना मिलते।
    शादी करदो इसकी, क्या ही फर्क पड़ता है गुड़िया क्या चाहती है,
    ©shreya_seth

  • shreya_seth 10w

    Pseudo

    I know that things don't go right in life,
    But I still remember how to smile.
    ©shreya_seth

  • shreya_seth 12w

    ज़िन्दगी एक जुआ.

    वो बुझते चिराग के धुएं से,
    डूब जाता है गमों के कुएं में।
    ये अंधेरों की शाज़िश थी,
    जो फिर हारा वो , जुए में।
    ©shreya_seth

  • shreya_seth 18w

    Glass ceiling

    अस्तित्व है, परन्तु!
    आभास.....
    चंद उपभोक्ताओं को है।


    ©shreya_seth

  • shreya_seth 18w

    पूरे मन से हँसा करती थी
    मै भी खुश रहा करती थी.....
    ©shreya_seth

  • shreya_seth 19w

    सफ़र

    तृष्णा मंजिल की ऐसी है,
    कुछ सागर जैसी गहरी है।
    एक ऐसी दौड़ में शामिल है,
    यहां घड़ी कभी ना ठहरी है।
    पथ के सारे स्वर सिमटे से,
    पतझड़ की छाया गहरी है।
    दिन ढलते देखो शाम है आई
    कल की थकान वहीं ठहरी है।
    ©shreya_seth