shriradhey_apt

Co-founder of Jhilmil Sitaare production house (jsitaare@gmail.com)

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Reposts
  • shriradhey_apt 5d

    बेतरकीब से जुड़े कुछ सलीक़े मेरे,
    आज भी रुके है दर पे ही तेरे !!
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  • shriradhey_apt 5d

    बन्द लिफ़ाफ़े की ख़ुशबू भी मिलती है उससे,
    जिस तरह उसके अनकहे लफ़्ज़ होते लबों से !!
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  • shriradhey_apt 5d

    वो महकता पन्ना

    बहुत मुद्दतों के बाद आज सोचा कि कुछ पन्ने पलट लिये जाए, हालांकि पढ़ना शुरू से ही पसंद है हमें पर इन दिनों इतनी उथल-पुथल के चलते कभी किताब को हाथ में लेकर पढ़ ही नहीं पाए। हाँ पर औरों की तरह सोशल मीडिया पर समय ख़ूब बर्बाद किया। हमें नॉवेल्स पढ़ना बहुत भाता है शायद इसी लिए इतनी बड़ी-बड़ी कहानियाँ लिख पाते है, कुछ अपनी तो कुछ अपने अपनों की। देखिये तो बात किताब के पन्नों से शुरू हुई थी और कहाँ पहुँच गयी। अपनी पसंदीदा किताब पढ़ने में एक अलग ही आनन्द आता है और उस पर जब उसके किसी पन्ने में जानी-पहचानी महक समायी हो और निशानी के तौर पर लाल सूखा गुलाब मिल जाये तो क्या कहने। फिर तो आपको आपकी काल्पनिक दुनिया और वास्तविक दुनिया का भेद कोई नहीं बता सकता। वो कुछ ऐसे ख़ास पल होते है जिन्हें आप दुबारा नहीं-नहीं जाने कितनी ही बार अपनी इच्छानुसार जीते है और उससे जुड़ी कितनी ही बातें आपके ज़हन में अपनी छाप छोड़ जाती है।

    कुछ ऐसा ही तो हुआ ना आज इस सुर्ख़ गुलाब को देखकर, जाने कितने ही हसीं पलों को ताज़ा कर गया। वहीं पल जब किसी के आने के इंतज़ार में प्लेटफार्म पर इस किताब के पन्ने उलट-पुलट कर रहीं थी और कुछ ही समय में ट्रेन की सीटी के साथ उसका आगमन जैसे रेगिस्तान की सूखी रेत पर बारिश की चमचमाती बूँद। बिल्कुल वैसे ही चमक रहा था वो हाथ में लाल गुलाब लिए। वो जानता है ना कि भारी-भरकम तोहफ़ों से ज़्यादा हमें ऐसे छोटे-छोटे तोहफ़े बेहद प्रिय है। उससे बात करते-करते जाने कब वो गुलाब किताब में रख लिया और बाकी दिनों की तरह वो दिन भी यादगार बन गया इस महकते पन्ने की तरह ....

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    वो महकता पन्ना

  • shriradhey_apt 1w

    उनके इंतज़ार में महीने गुज़र गए पल बन कर,
    वो आज तक लौटे नहीं आने वाला कल बनकर
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  • shriradhey_apt 1w

    कुछ बातें लफ़्ज़ों से ज़्यादा आँखें बयां कर देती है ...

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    रोक रखा था शायद उसने भी वर्ना,
    बरसात तो रोज़ की कहानी होती !!
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  • shriradhey_apt 1w

    उसकी बातें ख़ामोशियों में भी गूँजती है,
    मेरी चीख़ों में भी अज़ब की ख़ामोशी है !!
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  • shriradhey_apt 1w

    Guess what I meant to say .... ??

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    बूझो तो ...

    बिन बोले बाँहे थामे रहता है,
    रात-रात भर हमसे बतियाता है...

    सुख-दुःख का पुराना साथी है,
    जैसे अपने ही घर का बराती है...

    सपनें भी सुनहरे दिखलाता है,
    सवालों के जवाब भी बतलाता है...

    सोचा था बदलेगा वो भी एक दिन,
    पर आज तक नहीं आया वो पलछिन...

    जब भी रहता पास वो सुकूँ दिलाता है,
    अब बूझो तो, बोलो ना क्या कहलाता है...

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  • shriradhey_apt 1w

    वो चेहरे की बात करते है अकसर,
    जो ख़ुद नकाबपोश रहें हैं उम्र भर !!
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  • shriradhey_apt 1w

    गर मिलना ही ना होता तुमसे दुबारा,
    शहर का रुख़ पलट कर ना करते दुबारा !!
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  • shriradhey_apt 1w

    लकीरों को जोड़ने की बेइंतहा कोशिशों में,
    ख़्वाहिशों की गिनती कम होती गयी !!
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