shubhamgiri

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I don't know everything , if you know please tell me .

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  • shubhamgiri 1w

    किसी से सिर्फ उतना मिलो ,
    जितना वो मिलना चाहता है ।
    ©shubhamgiri

  • shubhamgiri 1w

    वक्त

    वक्त बेवक्त बेवजह क्यों परेशाॅ हूं ?
    जीत के लिए बस भागे चला जाता हूं ,
    वक्त बेवक्त भटक जाता हूं,
    अपने आप मै खोजने लगता हूं ,
    खुद को खुद मैं,
    पर वक्त निकल जाता है।
    न जाने ये वक्त क्या बतलाना चाहता है,
    न जाने ये वक्त कहाॅ ले जाना चाहता है।
    कुछ खोया सा कुछ पाया सा लगता है ,
    वक्त बेवक्त ये वक्त चले जाता है।।
    ©shubhamgiri

  • shubhamgiri 56w

    वक्त

    वक्त बेवक्त बेवजह क्यों परेशाॅ हूं ?
    जीत के लिए बस भागे चला जाता हूं ,
    जीत के लिए, जीत नहीं पाता ।
    वक्त बेवक्त भटक जाता हूं,
    अपने आप मै खोजने लगता हूं ,
    खुद को खुद मैं,
    पर वक्त भाग निकल जाता है।
    न जाने ये वक्त क्या बतलाना चाहता है,
    न जाने ये वक्त कहाॅ ले जाना चाहता है।
    कुछ खोया सा कुछ पाया सा लगता है ,
    वक्त बेवक्त ये वक्त चले जाता है।।
    ©shubhamgiri

  • shubhamgiri 63w

    क्यों डरे की ज़िन्दगी मैं क्या होगा,
    हर वक़्त क्यों सोचे की बुरा होगा,
    बढ़ते रहे मंज़िलों की ओर कुछ न भी मिला तो क्या?
    तजुर्बा तो नया होगा।

  • shubhamgiri 74w

    शिव

    शिव
    अघोर है , विभोर है ,
    संसार की मोह माया से पार है,
    भटकते हुए राहगीर को रास्तों को दिखाने वाले महाकाल हैं,
    काल को भी हर ले वह महाकाल है
    शिव है ,शिव है ,शिव है,
    अंत नहीं जिनका अनंत है
    लोगों के विष को हर के जीवन देने वाले नीलकंठ है ।
    शिव है ,शिव है ,शिव है
    शिव ही अनंत है, शिव ही विराट है
    चिंता से मुक्त शिव ही आपार है ।
    शिव है, शिव है ,शिव है
    शिव स्नेह शिव राग है शिव ही अनुराग है ,
    शिव ही सत्य है, सत्य ही शिव है
    शिव ही शक्ति है, शिव ही मोक्ष का द्वार है ।
    शिव है ,शिव है ,शिव है ।
    ©shubhamgiri

  • shubhamgiri 84w

    इंतज़ार

    नये साल के इंतजार में, एक साल और चला गया, कुछ रह गए कुछ खो गए,
    कुछ का इंतजार रह गया, देखो ना फिर से यह साल चला गया ।
    ©shubhamgiri

  • shubhamgiri 95w

    खोज

    जिंदगी की भी क्या परिभाषा है ना दोस्तो,
    "खोए हुए हम खुद है ढूंढते भगवान को है "
    ©shubhamgiri

  • shubhamgiri 104w

    सुक्र है तेरा...

    मै क्या था इस संसार में बस भटकता ही जा रहा था ,
    अपने आप से ही बिछड़ता जा रहा था ,
    माया रूपी भवर फंसा हुआ फिक्र में था ,
    लेकिन अब बेफिक्र हू , क्योंकि सुक्र है तेरा ।
    जय श्री कृष्णा
    ©shubhamgiri

  • shubhamgiri 106w

    जाने आजकल मैं कहां खो जाता हूं ,
    कभी-कभी अपनी ही बातों पर रो जाता हूं
    ©shubhamgiri

  • shubhamgiri 117w

    खामोशियां एहसास है ,
    तुम्हें महसूस होती है क्या ?
    ©shubhamgiri