shubhamjoshi

Indian, Teacher, Common Man

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Reposts
  • shubhamjoshi 1w

    एक दरवेश मेरे ज़िस्म को छू कर बोला,

    क्या अजीब लाश है साँस भी लेती है..!

    ©shubhamjoshi

  • shubhamjoshi 2w

    अज़ीज

    नहीं रहा डर अब मृत्यु का मुझे
    उस लाइलाज रोग का मरीज रह चुका हूँ..!
    मै वाकिफ़ हुँ चार दिन कि मोहब्बत से..
    मै भी किसी कि अज़ीज़ रह चुका हूं..!!!
    मैं ज़रूरत था और वो आदत थी मेरी
    मैं किसी अधूरे ख्वाब सा..
    और वो हक़ीक़त थी मेरी
    अब ना हम किसी सपने में है
    ना किसी किसी की हकीकतों में..
    स्वप्नों को दूर रखने वाला ताबीज़ रह चुका हू..!
    मै वाकिफ़ हुँ चार दिन कि मोहब्बत से..
    मै भी किसी कि अज़ीज़ रह चुका हूं..!!!
    वाकिफ़ था मैं इससे कि..
    ये रिश्ता ज़्यादा नही जी पायेगा..
    पूरी होंगी रस्में पहले इश्क़ की..
    दिल को फिर फ़ुर्सत में तोड़ा जायेगा..!
    उसके शौक की खातिर जो उधेड़ी गई
    उन भावनाओं की कतरनों से बनी कमीज़ रह चुका हूं..!
    मै वाकिफ़ हुँ चार दिन कि मोहब्बत से..
    मै भी किसी कि अज़ीज़ रह चुका हूं..!!!
    ©shubhamjoshi

  • shubhamjoshi 3w

    मेरे हाथों में अपना हाथ रख दो
    और सोंचो..


    क्या इसके बाद दुनिया में और भी कुछ पाना है ..?

    ©shubhamjoshi

  • shubhamjoshi 3w

    जैसे
    किसी वाद्य से
    बाहर आ
    संगीत खोजने लगता है शब्द

    जैसे शब्द
    अपने अर्थ को,

    मैंने खोजा तुम्हें ...
    ©shubhamjoshi

  • shubhamjoshi 3w

    साल के अंतिम दिन तक भी सवाल करती रही चाय मुझसे,

    अगर मै ना होती तो तुम्हारा कौन होता ।।

    ©shubhamjoshi

  • shubhamjoshi 3w

    आज फिर उसने किसी का दिल तोड़ा होगा..
    आज फिर से कोई जम कर रोया होगा..!
    .
    .
    दिसम्बर में यूँ अक्सर बारिशें कहाँ हुआ करती है..!!
    ©shubhamjoshi

  • shubhamjoshi 3w

    बताऊँ तुम्हे एक निशानी उदास लोगो की,,,
    कभी गौर करना ये हँसते बहुत हैँ....!!
    ❤️
    ©shubhamjoshi

  • shubhamjoshi 3w

    घाट का एक खामोश पत्थर हूँ मै,

    मैनें नदी के हज़ार नख़रे देखे है..!!

    ©shubhamjoshi

  • shubhamjoshi 4w

    फरवरी और दिसम्बर

    तुमसे मिलने के मौसम फरवरी थे
    हमारे बिछड़ने के दिसंबर

    होठों के चुम्बन फरवरी थे
    आलिंगन दिसंबर

    लाल गुलाब फरवरी थे
    पीले टेसू दिसंबर

    माथे की बिंदिया फरवरी थी
    पैरों के नूपुर दिसंबर

    सावन भादों फरवरी थे
    उबलते जेठ दिसंबर

    त्यौहार सारे फरवरी थे
    पीड़ा बन गई दिसंबर
    मधुर गीत फरवरी थे
    वेणुनाद दिसंबर

    कोरे कागज़ फरवरी थे
    नीली कलम दिसंबर

    प्रार्थनाएं सारी फरवरी थी
    प्रतीक्षा बनी दिसंबर

    राधा रमण फरवरी थे
    खारी यमुना दिसंबर

    कृष्ण हमारे फरवरी थे
    गाय गोपियां दिसंबर

    द्वारिकापुरी फरवरी थी
    कुंज बना दिसंबर

    कविताएं सारी फरवरी थी
    किस्से कहानियां दिसंबर
    ©shubhamjoshi

  • shubhamjoshi 5w

    लिहाफ़

    जब भी सुनता हूँ तो खो जाता हूँ
    तेरी आवाज़ में नशीले राग बहुत है..!
    सर्द रातों में इन्हें ओढ़ कर सो जाता हूँ.....
    तेरी यादों के लिहाफों में अभी आग बहुत है..!!

    बहोत प्यार है तुमसे और ये बात,
    तुम्हे छोड़ सभी जानते थे...
    करते थे बेसिर पैर की बातें
    रहेंगे साथ सदा हम, शायद ये भी मानते थे..
    जगाई गई उम्मीदों पर इनकी
    तुम्हारे फैसलों के आघात बहुत हैं..!
    सर्द रातों में इन्हें ओढ़ कर सो जाता हूँ.....
    तेरी यादों के लिहाफों में अभी आग बहुत है..!!

    चाहने पर भी मृत्यु आती नहीं
    शायद तुम दूर से मेरा ख़याल रखती हो..
    सिगरेट के आखिरी कश में भी
    तुम साफ़ साफ़ दिखती हो..
    साथ तुम्हारे शांत सी ठहरी थी ज़िंदगी
    अब इसमें भागमभाग बहुत है..!
    सर्द रातों में इन्हें ओढ़ कर सो जाता हूँ.....
    तेरी यादों के लिहाफों में अभी आग बहुत है..!!
    ©shubhamjoshi