singh_ankit_hunny

upsc aspirant. "main to wo likh deta hun jo mere dil me aaye agar aapke dil ko chu jaye to mahaj 'ittefak' smjhiye."

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  • singh_ankit_hunny 22w

    'द कश्मीर फाइल्स' इसे अगर मैं एक चलचित्र का नाम दे दूं तो गद्दारी होगी अगर ये घटना सच्ची होगी तो मैंने जो किताबो में पढ़ा है और सुना है उस हिसाब से तो सच ही प्रतीत होता है मगर फ़िल्म के कुछ हिस्से आपको झकझोर सकते हैं. फिल्म 1990 में कश्मीरी पंडितों संग हुई उस घटना को बयां करती है, जिसने उन्हें आतंकियों ने अपने ही घर से भागने पर मजबूर कर दिया था. इसके अलावा लेफ़्ट विंग को लेकर बनी उनकी फ़िल्म बुद्धा इन अ ट्रैफ़िक जाम ने भी काफ़ी सुर्ख़ियां बटोरी थीं. 'द कश्मीर फाइल्स' उसी कड़ी का एक हिस्सा नज़र आ सकता है, जिसमें ग्राउंड की कुछ कहानियों को पर्दे पर दिखाया गया है. मगर सच कहूं तो ये घटना सच का 10% भी है तो अपने ह्र्दयतल के गहराइयों से संवेदना प्रकट करता हूँ। बाकी शब्द कम पड़ सकते है बहुत उम्दा जबरदस्त निर्देशन, कहानी , अभिनय..। कमजोर दिल वालो के इतर, एक बार जरूर देखें लास्ट की पंक्तियों के लिये.. इंकलाब जिंदाबाद..। #VivekAgnihotri #kasimirfiles #acting #fullofawesomeness

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    द कश्मीर फाइल्स

    ©singh_ankit_hunny

  • singh_ankit_hunny 66w

    सुनो #ठकुराईन❤️
    दिल करता है की तेरे सीने से लिपट कर बताऊँ,
    तुझसे दूर रहकर यूं तन्हा जीने में कितना दर्द होता है..

    ©singh_ankit_hunny

  • singh_ankit_hunny 66w

    बंगाल भारतीय नवजागरण का केंद्र रहा है जहाँ से उठने वाली चेतना की लहरों ने भारतीयों को सामाजिक सांस्कृतिक एवं धार्मिक रूढ़ियों से मुक्त करने का प्रयास किया था।नवता ,इहलौकिकता,मानवता और जनपक्षधरता को लेकर चलने वाला ये सांस्कृतिक नवजागरण अपनी प्रासंगिकता के कारण तमाम बौद्धिक विमर्शों का केंद्र रहा।आज के परिदृश्य में यही दृष्टिगोचर हो रहा है कि बंगाल अब भी अपने मूल उद्देश्य से भटका नही है और उसकी जड़ें राजा राममोहन राय, ईश्वर चंद्र विद्यासागर , देवेंद्रनाथ ठाकुर और केशवचंद्र सेन जैसे चिंतकों से पोषित हैं।

    (मानवता की छाती पर क्रूरता के इस तांडवी नृत्य रूपी चुनाव को इतिहास याद रखेगा।)
    ©singh_ankit_hunny

  • singh_ankit_hunny 79w

    बस यूं ही...

    पता नही क्यों आपके साथ गुजारे हर एक वो लम्हा बहुत तड़पाता है मुझे, यूं तो कब का खो चुका हूँ खुद को खुद से ही , बस कुछ बचा है मेरे और आपके दरमियां जो आज भी जिंदा है, वरना सच कहूं तो आपके हिसाब से देखूं तो कब का मर गया हूँ मैं आपके लिए आपने ही बोला था ये तो, बस अगर कुछ बचा भी है तो आपके किये हुए वादे, ढेर सारी आपकी यादें....!!!
    पता नही आपको कुछ याद भी है या नही.. शायद नही होगा क्योंकि अब तो बहुत खुश रहती हो न सुना है महसूस भी करता हूँ आपकी खुशी को अब ये मत सोचना भला कैसे? तो बता दूं आपसे सिर्फ प्यार नही हुआ था मुझे मोहब्बत हुई थी, और बोला भी था आपसे जीवन मे बस आपकी खुशी चाहता हूँ और कुछ नही और देखो न आजतक भगवान ने मेरी एक न सुनी लेकिन ये सुन ली, और मैं खुश भी हूँ क्योंकि आप जो खुश हो, और ह आपको तो पता है न बहुत लम्हा जो साथ गुजारा था सच मे वो अब तक के मेरे सबसे हसीन लम्हो में से एक है, और हो भी क्यों न हर लम्हों में जो आप थी...!!!
    अपना ख्याल रखना हमेशा खुश रहना...
    ©singh_ankit_hunny

  • singh_ankit_hunny 86w

    प्रेम किसी शब्द का मोहताज नही होता।
    बहुत दिनों बाद एक सुंदर छवि प्राप्त हुआ।����
    # मासूमियत

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  • singh_ankit_hunny 92w

    उस बुजुर्ग की उंगलियों में
    कोई ताकत तो न थी,
    जब झुका सर मेरा तो कापते हाथों ने
    जमाने भर की दौलत दे दी…।
    # धोती वाली हमारी # आखिरी_पीढ़ी और उनके निश्छल मन मे अन्न देवता का सम्मान

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  • singh_ankit_hunny 97w

    बेटी बचाओ नारा नही , अपितु धमकी की तरह लगता है अब तो, मेरे पास शब्द नही की मैं कुछ लिख सकू मन बहुत व्यथित होता है कि हम महामारी से तो आज नही तो कल जंग जीत लेंगे मगर जो मानसिक महामारी से घिरे लोग हैं उनका क्या करेंगे? विचार करें और सुझाव दे।������
    # हाथरस # बलरामपुर

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    शव तक न मिलना यह सिद्ध करता कि अतीत में हमने दलितों के साथ क्या क्या किया होगा ।
    रामराज्य में शंबूक की हत्या होती रहेगी । पर शम्बूक की बेटी के साथ जो हुआ वह 21सदी के लोकतांत्रिक संवैधानिक भारत पर कलंक है । डूब मरने का दिन है ।
    नपुंसक खामोशियाँ बड़े-बड़े हस्तिनापुरों को लाशों के ढेर में तब्दील कर देती है!नेतागण बिहार में बिजी है,चौथा खम्भा राजविदूषकों के यहाँ चरस की पुड़िया ढूँढने में बिजी है ! सभ्यता के पतन का मार्ग इन दिनों जीडीपी की तरह ईज़ी है।
    पढ़ो और हया बाकी है तो सवाल पूछो????
    जो सरकारें बेटियों महिलाओं को सुरक्षा नही दे सकते बजाय दमन करते उन्हें सत्ता पर रहने का कोई अधिकार नही ।

  • singh_ankit_hunny 99w

    वजह ये है कि सरकारी नौकरी एक तिलिस्मी चाभी है जो एक निम्नवर्गीय व्यक्ति को भी समाज के इलीट क्लास में पहुँचने का रास्ता दिखाता है।
    सदियों से जो दबे कुचले वंचित गरीब रहे है, जिनके बाप बड़े व्यवसायी, किसान, प्रोपर्टी होल्डर नही है, जो बेटे को बड़ी विरासत दे जाएं, और कहें बेटा डर मत मैं हूं न तुम्हारा भविष्य सिक्योर है।
    सरकारी नौकरी उन लोगो की लाइफलाइन और जीवन को बेहतर बनाने का मौका है,, जो जानते है कि उनके पास इतनी पूंजी नही की बडा व्यवसाय खड़ा कर सके, 4 दुकान किराए पर लगाकर बिना मेहनत कमा खा सके,,और इज्जत के साथ जी सके।।
    वो आम आदमी ये जानता है, की अपना अतीत और माता पिता वो बदल नही सकता, पर उसकी मेहनत और सरकारी नौकरी उसकी किस्मत बदल सकती है,इसलिए वो हाड़तोड़ परिश्रम करता है।।
    जिस युवा दौर में उसके साथी, जोकि बड़े बाप की औलाद है ,महंगी बाइक कार में सड़क के चौराहों रेस्टोरेंट में घूम रहे होते है, वो दिल्ली भी नही जा सकता, इसलिए इलाहाबाद(प्रयागराज) के 600 से 1000 के कमरे में रात 2 बजे तक अपनी आँखें खराब कर रहा होता है, मैकडोनाल्ड डोमिनोज़ कौन कहे, सड़क के ढाबे पर खाने के पहले भी दो बार सोचता है कि उसके पिता कैसे ये सब खर्च मैनेज कर रहे होंगे,
    वो जिंदगी का सबसे बड़ा दाव खेलता है, जो बड़े बड़े दिग्गजों के बस की नही होती, 18 साल से 30 साल की गोल्डन age बन्द कमरों की किताबों पर कुर्बान कर देता है, बिना यह सोचे कि जॉब नही मिली तो वो क्या करेगा,, साहब जिंदगी के 18 20 साल सिर्फ एक उम्मीद पर झोंक देना मज़ाक नही होता।
    साहब,अमीरों को फर्क नही पड़ता, उनकी लाइफ को बेहतर बनाने के 100 रास्ते वो खुद बना सकते है, या सरकार या जुगाड़ बना देती है, पर गरीब का क्या वो तो ले देकर सरकारी नौकरी को ही अपनी सबसे बड़ी सीढी समझता है।
    निजीकरण अच्छा हो सकता है,, पर क्या वो गरीब को ये सम्मान दे पाएगा.?
    क्या निजीकरण के बाद एक गरीब का बच्चा महंगे कॉलेज से mba mbbs, md, इंजीनियर अफसर बन पाएगा?
    जवाब अपने आप मिल जाएगा कि सरकारी संस्थान क्यों जरूरी है।

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    निजीकरण की तमाम बहस के बावजूद सरकारी नौकरी का मोह जाता नही, क्यूं??
    ©singh_ankit_hunny

  • singh_ankit_hunny 104w

    मुझे पहला मैच वही याद है जब धोनी ने श्रीलंका के खिलाफ नाबाद 183 रन की पारी खेली थी.....बड़ी बात ये थी कि उस मैच में धोनी ने 10 छक्के जड़े थे, जो मुझ जैसे 10 11 साल के लड़के के जेहन में याद रह जाने को काफी था.....!!!!!
    लेकिन धोनी होना भी इतना आसान कहाँ है !
    धोनी होने के लिये आपको लोगों की टूटती उम्मीदों को जोड़ना होता है, जमीन पर खड़े होकर हेलीकाप्टर उड़ाना होता है, टूटे अँगूंठे के साथ खेलना पड़ता है, बिना देखे गेंद को स्टंप्स में मारना पड़ता है, पलक झपकने से पहले गिल्लियाँ बिखेर देना होता है.....कोई कितना कुछ बोल ले लेकिन उस पर कोई प्रतिक्रिया न देना और मैदान में जवाब देना होता है धोनी होना.....धोनी होने के बाद भी सबसे मुश्किल काम ये है कि धोनी होकर भी धोनी बने रहना.....!!!!!
    मेरे लिए क्रिकेट तभी पूरा होता है ,जब तीन डण्डों के पीछे खड़ा धोनी आंखों से सुन और हाथों से बोल रहा हो.....जब सबके माथे पर पसीने की बूंदे हों उस वक्त में भी शान्त रह कर मैच को जीत कर ले आना होता है धोनी होना.....!!!!!
    क्रिकेट पहले भी खेला जाता था,
    क्रिकेट आगे भी खेला जायेगा.....लेकिन आँखों में जीत का भरोसा लिये एक इकलौता सा इंसान अब क्रिकेट को अलविदा कह दिया....तुम उसको कितना भी बोल लो पूरे देश के साथ वो बाइस गज की पट्टी और वो तीनों ड़डे भी रोयेंगे, जिसके पीछे वो 15 साल से खड़ा है.....
    धोनी सच कहूँ तो नाम ही काफी हैं। लाखों आलोचकों और करोड़ों फैन को अब शायद 7नंबर जर्सी पहने हुए धोनी न दिखे मैदान में, कहने के लिए तो धोनी ने सन्यास ले लिया हैं पर सच कहूं तो सन्यास ले लिया उस उम्मीद ने की हम कहते थे कि मैच देखेंगे अभी धोनी हैं।एक चमकता सितारा आज अपनी रोशनी को अपने आप में समेट कर अपने रोशनी का अंत कर दिया। खिलाड़ी आएंगे जाएंगे पर धोनी जैसा शायद ही कोई और आये।
    जब जब इस बाइस गज की पट्टी और विकेट के पीछे खड़े खिलाड़ियों की बात होगी, तब तब एक नाम सबसे पहले लिया जायेगा.....वो नाम है.....महेन्द्र सिंह 'धोनी'.....❤
    ©singh_ankit_hunny

  • singh_ankit_hunny 104w

    साधना का शेष रहना चाहिए , मैं भले मिट जाऊँ मेरा देश रहना चाहिए।
    स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
    ©singh_ankit_hunny