sonugangwar

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तलाश में हुँ खुद की।

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  • sonugangwar 1w

    अश्क़ आंखों से पिघलते देखा है
    हमने नज़र को नज़र लगते देखा है,

    अपने हुस्न पर यूँ गुमां न कर
    हमने कई हूरों का ढलते देखा है,

    अब वो मंज़िल तक पहुँच ही जायेगा
    मैंने उसे घर से निकलते देखा है,

    फिर कोई महफ़िल होगी घायल
    मैंने उसको फिर संवरते देखा है,

    जब तक हो सके निभा वादा न कर
    मैंने वक्त को पल में बदलते देखा है,

    ज़िम्मेदारियों के चराग़ जलाने के खातिर
    'राग' ने अपने ख़्वाबों को जलते देखा है।
    ©sonugangwar(Raag)

  • sonugangwar 4w

    ज़िन्दगी को आसान बनाना है
    अब हमें इश्क़ से बाहर आना है,

    तुम क्यों पूछते हो मुझसे पता मेरा
    हम खानाबदोशों का कहाँ ठिकाना है,

    कहीं नही मुमकिन तो ख़्वाब में तो आ
    मुझे तेरे संग एक तस्वीर खिंचाना है,

    आओ बैठो अपनी ख़ुशी की दास्ताँ सुनाएँ
    चलो छोड़ो वो किस्सा बहुत पुराना है,

    क्या सही क्या गलत इसे कैसे सूझे
    यार ये शख्स पागल नही दीवाना है,

    'राग' कैसे छोड़ दे लिखना बोलो
    ये इसकी रूह का आब-ओ-दाना है।
    ©sonugangwar(Raag)

  • sonugangwar 4w

    सफ़र में मंजिल की बातें अच्छी लगती हैं
    दिन तुम रखो मुझे रातें अच्छी लगती हैं,

    ये तुम किस तरह इसे निभाये जा रहे हो
    इश्क़ की तो बस शुरुआते अच्छी लगती हैं,

    इससे क्या फ़र्क पड़ता है कब और कैसे हुईं
    यार से जैसी भी हों मुलाकातें अच्छी लगती हैं,

    इन्हें क्या मालूम यहाँ लोग नही लाशें रहती हैं
    गाँव के लोगों को ऊँची इमारतें अच्छी लगती हैं,

    शायद साज़िश है जो संभल-संभल कर चल रहे हो
    वरना इश्क़ में तो हिमाकतें अच्छी लगती हैं,

    'राग' ये बेबाकपन एक दिन तुम्हें मरवा देगा
    इस जहान में किसे सदाकतें अच्छी लगती हैं।
    ©sonugangwar(Raag)

  • sonugangwar 4w

    चेहरे कई तूने इस चेहरे पर लगाये हैं
    यार रहम कर सब छोड़ कर तेरे पास आये हैं,

    तू तो सुकून की हद तक पहुँच गया होगा
    सुना है तूने इश्क़ में कई दिल जलाये हैं,

    वास्ता सबसे रखना तो मेरे बस का नही
    पर जिससे है वो पलकों पर बिठाये हैं,

    ये तेरा मेरा होने का क्या फायदा है
    जब घर के चराग मैंने खुद बुझाये हैं,

    इश्क़ के मारो से क्या लगाते हो उम्मीद
    हम जो दे सकते हैं वो बस दुआयें हैं,

    जो खाने को पुछे वो बस माँ है 'राग'
    बाकी बस पूछते हैं पैसे कितने कमाये हैं।
    ©sonugangwar(Raag)

  • sonugangwar 5w

    जो मुझे रुलाते हैं मैं उनको हँसा रहा हूँ
    यार मैं कैसे लोगो के काम आ रहा हूँ,

    ये इश्क़ मोहब्बत मेरे बस की बात नही
    यार तुम करो मैं तो घर जा रहा हूँ,

    ये होटलों का खर्चा तो मुझे मार डालेगा
    अब मैं उसके शहर में घर बना रहा हूँ,

    यार क्या ऐसे ज़िन्दगी बसर हो जायेगी
    पैसे कमाने थे और मैं नाम कमा रहा हूँ,

    तेरे बाद मुझे जो मिलता है यही कहता हूं
    आप चलिए मैं बस आ रहा हूँ।

    देखना अब मुझे ख़्वाब रंगीन आएंगे 'राग'
    मैं उसकी तस्वीर सीने से लगा रहा हूँ।
    ©sonugangwar(Raag)

  • sonugangwar 6w

    ऐ ज़िन्दगी तेरा कर्ज़ चुकाते चुकाते
    हम रो पड़े हैं यहाँ सबको हँसाते हँसाते,

    मैंने मान लिया था चलो क़िस्सा खत्म हुआ
    फिर हाथ हिला दिया उसने शहर से जाते जाते,

    तमाम रात लबों पर सिसकियों का कब्ज़ा था
    अश्क़ भी थक गए हैं तेरी याद मिटाते मिटाते,

    ये जो तुम हर वक्त आईने से रखती हो वास्ता
    सूरत मत बिगाड़ लेना खुद को सजाते सजाते,

    यार अब कोई तो हो जो हमें भी ढूंढ कर लाए
    ख़ुद से बहुत दूर चले गए तेरे पास आते आते,

    मैंने कहा था किसी को इतने करीब मत करना
    रूह जला ली ना उसके निशाँ जलाते जलाते,

    'राग' यूँ गौर से उसके घर की तरफ मत देख
    वो दौर दूसरा था वो खिड़की पर थे आते जाते।
    ©sonugangwar(Raag)

  • sonugangwar 7w

    मैं कभी लड़ा था ख़ुदा से जिसे पाने के लिए
    ख़ुदा का वास्ता दिया है उसी ने दूर जाने के लिए।
    ©sonugangwar

  • sonugangwar 8w

    सब करिये दुआ इस जहाँ के लिए
    कोई रोए न फ़क़त दवा के लिए,

    किसे था मालूम ऐसा भी होगा
    हम तरस जाएंगे इस हवा के लिए,

    तमाम रात रोये हैं सोये नही हैं
    हस्पताल में दो गज़ जगह के लिए,

    यार ये तो कहर ढाता जा रहा है
    कोई तो टाले इस समां के लिए,

    सबको अपने ही घर में कैद कर दिया
    परिंदे देंगे क्या दाना-पानी इंसा के लिए,

    यूँ तो उसे किसी की फिक्र न थी 'राग'
    ख़ुद पर आई हाथ उठे रहे दुआ के लिए।
    ©sonugangwar(Raag)

  • sonugangwar 10w

    ये 'राग' कई हिस्सों में बँटा है
    आपको जो मिले उसे पाकर खुश रहिए।
    ©sonugangwar(Raag)

  • sonugangwar 10w

    मैं तेरे शहर आया और तू मिला ही नही,
    सीधे आ जाऊं घर इतना हौसला ही नही,

    बस मलाल है मुझे कभी इश्क़ था तुझसे
    वरना तो मुझे तुझसे कोई गिला ही नही,

    सुना हैं वक़्त आने पर चीज़ मिल जाती है
    पर तेरे बाद ये वक़्त कभी चला ही नही,

    तुम रो रहे हो की आँधियाँ बुझा रही हैं
    मुझसे पूछो जिसका चराग़ जला ही नही,

    सब पूछेंगे किसने दिया तो क्या बताऊंगा
    रखा हुआ है तेरा लहज़ा मैंने सिला ही नही,

    माँ ने एक बार क्या की दुआ मेरे हक में
    'राग' मंज़िल पर है जो कभी चला ही नही।
    ©sonugangwar(Raag)