sonugangwar

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तलाश में हुँ खुद की।

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  • sonugangwar 2w

    होश में रहने के लिए भी शराब चाहिये
    ज़िन्दगी और कितनी होनी खराब चाहिए,

    हम तो एक पल भी खुद के लिये न जीये
    इन लोगों को फिर भी हमसे जवाब चाहिये,

    शहर में क़त्ल रोकने का एक ही तरीका है
    इस लड़की के पूरे बदन पर हिज़ाब चाहिए,

    एक तुम जो हिसाब के पक्के हो बहुत
    एक हम जिसे इश्क़ बे-हिसाब चाहिए,

    खरीद लाया हूँ ख़ुद को बेचकर सारे के सारे
    अब तुम बताओ तुम्हें कौनसा ख़्वाब चाहिए,

    'राग' ने सारी ज़िन्दगी सामने खोल कर रख दी
    तुम्हें सीखने के लिए अब भी कोई किताब चाहिए।
    ©sonugangwar(Raag)

  • sonugangwar 4w

    तुम्हारे चेहरे की चमक बता रही है
    तुमने फिर किसी को कहीं का नही छोड़ा है।
    ©sonugangwar

  • sonugangwar 9w

    इश्क़ की पहली क़िस्त भर दी गई है
    दर्द की दिल में जगह कर दी गई है,

    ख़ामोश रहने का हुनर कुछ ऐसे सीखा
    जुबां की जगह क़लम रख दी गई है,

    तुम मुझे कुछ दिन और पास रख लो
    अभी बरसात बाकी है बस सर्दी गई है,

    अब देखते हैं यार आगे क्या होता है
    तुम्हारी तस्वीर अभी घर दी गई है,

    हँसते खेलते थे फिर इश्क़ हो गया तुम्हें
    मत मानो, तुम्हें बदुआ तो पर दी गई है,

    दर्द को थोड़ी देर आप संभाल कर रखिए
    'राग' आता होगा उसे कॉल कर दी गई है।
    ©sonugangwar(Raag)

  • sonugangwar 9w

    मुझे उसको गले लगाना है
    जिसका हर शख़्स दीवाना है,

    मोहब्बत है और बेशूमार है
    बस बाकी उसे बताना है,

    जिसे चाहो वो मिल जाए
    वैसे ख़्वाब काफ़ी सुहाना है,

    गिले छोड़ो यार साथ बैठों
    एक दिन सबको मर जाना है,

    ज़ख्म दिखाओगे नासूर कर देंगे
    दोस्त ये माँ नही जमाना है,

    'राग' क्यों लगाते हो वफ़ा की उम्मीद
    यार बस तुम हो वो नही दीवाना है।
    ©sonugangwar(Raag)

  • sonugangwar 11w

    जब रफ़्ता-रफ़्ता मैं उसको जानने लगा था
    मालूम हुआ इंसा को खुदा मानने लगा था,

    लोगों ने रोका ये तुम्हें कहीं का नही छोड़ेगा
    मैं तो दिल को पिंजरे से निकालने लगा था,

    तुमने उम्मीद देकर फिर बना दिया अपाहिज़
    ये बे-अक्ल लड़का खुद को संभालने लगा था,

    फिर मैं सबकी समझ से होने लगा वाहिर
    खुदा मुझमें नए-नए क़िरदार डालने लगा था,

    तुम आये हो तो चलो पहले चाय पी लेते हैं
    वरना मैं खुद को बस मारने लगा था,

    यार इससे ज्यादा इश्क़ और क्या करता 'राग'
    जमाना उन्हें हमारे नाम से जानने लगा था।
    ©sonugangwar(Raag)

  • sonugangwar 12w

    हमें जो है तेरी आदत छोड़ रहे हैं
    ऐसा लगता है इबादत छोड़ रहे हैं,

    मैं गले भी मिलूँगा और दिल भी मिलाऊँगा
    आप बस बताइये कब दिखावट छोड़ रहे है,

    बाजार-ऐ-इश्क़ में हम भी लगायेंगे बोली
    बहुत हुआ अब हम शराफत छोड़ रहे हैं,

    हम कभी तन्हा थे अब हुज़ूम में हैं
    बस हमने कहा सदाकत छोड़ रहे हैं,

    देखना ये लोग भी मेरी तरह ही रोयेंगे
    ये इश्क़ कर रहे हैं तिज़ारत छोड़ रहे हैं,

    उम्मीद थी सुकूँ की पर ये तो रुलाती है
    चलो अब 'राग' ये लिखावट छोड़ रहे हैं।
    ©sonugangwar(Raag)

  • sonugangwar 13w

    तुम्हें मुझको बताना चाहिए था
    गर शक्स कोई दीवाना चाहिए था,

    तुमने मरा हुआ समझ के छोड़ दिया
    मैं उठ जाता आवाज़ लगाना चाहिए था,

    ख़ैरात में मिली चीज़ें कहाँ रुकती हैं
    तुम्हें इस इश्क़ को कमाना चाहिए था,

    तुम जा रहे जो कि मैं वक्त नही देता
    ख़ैर छोड़ो तुम्हें तो बहाना चाहिए था,

    ना इश्क़ मुक्कमल हुआ ना नींद ही
    यार उन रातों सो जाना चाहिए था,

    'राग' दीवाना हैं कहीं फिर न उठ जाए
    इसे दफनाना नही जलाना चाहिए था।
    ©sonugangwar(Raag)

  • sonugangwar 13w

    ख़्वाब आँखों के आँखों में ही मारे जाएँ
    शायद ऐसे ज़िन्दगी के कर्ज़ उतारे जाएँ,

    खूबसूरती पर हर कोई मर रहा है यहाँ
    सबको चाँद चाहिए कहाँ हम सितारे जाएँ,

    शायद इसे मालूम हो मेरे बे-हाली का सबब
    सोचा है कुछ पल आईने के साथ गुज़ारे जाएँ,

    दिल,हयात,वक्त,क़िस्मत सभी तो बिगड़े हुये है
    चलो छोड़ो यार अब क्या-क्या सँवारे जाएँ,

    मैंने हाल देखा है इसमें डूबने वालो का
    सो दुआ की सब इश्क़ से किनारे जाएँ,

    हममें जीने की तम्मना सी जाग गयी 'राग'
    जब उसने कहा आप पर बच्चे हमारे जाएँ।
    ©sonugangwar(Raag)

  • sonugangwar 14w

    अश्क़ आंखों से पिघलते देखा है
    हमने नज़र को नज़र लगते देखा है,

    अपने हुस्न पर यूँ गुमां न कर
    हमने कई हूरों का ढलते देखा है,

    अब वो मंज़िल तक पहुँच ही जायेगा
    मैंने उसे घर से निकलते देखा है,

    फिर कोई महफ़िल होगी घायल
    मैंने उसको फिर संवरते देखा है,

    जब तक हो सके निभा वादा न कर
    मैंने वक्त को पल में बदलते देखा है,

    ज़िम्मेदारियों के चराग़ जलाने के खातिर
    'राग' ने अपने ख़्वाबों को जलते देखा है।
    ©sonugangwar(Raag)

  • sonugangwar 17w

    ज़िन्दगी को आसान बनाना है
    अब हमें इश्क़ से बाहर आना है,

    तुम क्यों पूछते हो मुझसे पता मेरा
    हम खानाबदोशों का कहाँ ठिकाना है,

    कहीं नही मुमकिन तो ख़्वाब में तो आ
    मुझे तेरे संग एक तस्वीर खिंचाना है,

    आओ बैठो अपनी ख़ुशी की दास्ताँ सुनाएँ
    चलो छोड़ो वो किस्सा बहुत पुराना है,

    क्या सही क्या गलत इसे कैसे सूझे
    यार ये शख्स पागल नही दीवाना है,

    'राग' कैसे छोड़ दे लिखना बोलो
    ये इसकी रूह का आब-ओ-दाना है।
    ©sonugangwar(Raag)