soonam

www.mirakee.com/soonam

I express my feelings by playing with my own words❣️

Grid View
List View
Reposts
  • soonam 1w

    जब हार जाए मन
    देखना उस सफर के आइने में
    जहां से तूने किया था शुरू
    अपने सपनों को साकार करने में..

    तय तो सब शुरू से ही था
    आएंगी कई अड़चनें, होंगी कई परेशानियां
    पर उनसे लड़ने का फैसला
    हमारे कंधों ने तो लिया था खुद..

    भले जितनी भी मुश्किलें आईं हों
    जोश तो उतनी ही लगाई होगी तूने
    कोशिश तो पूरी ही की होगी
    सहा तो उतना होगा..

    फिर ये निराशा कैसी
    फिर ये मायूस मन..क्यों..?

    जब हार जाए मन
    याद करना उन चेहरों को
    जो तेरे साथ चले थे
    भले वो तेरे साथ ना हो आज
    पर जुड़े तो तेरे साथ ही है..

    फिर करते हैं ना शुरू
    शुरू से नहीं बीच मझधार से
    पकड़ते हैं उन्हीं कोशिशों की डोर को
    एक नई उम्मीद, नई आधार से..

    ले तू एक लंबी सांस
    कर ले थोड़ा आराम
    चलना अभी बहुत दूर है
    रुकने का ना कोई निशान
    धैर्य रख..मन को बहला
    बन नाविक अपने सफ़र का
    अपने सपनों को साकार बना!!
    ©soonam


    @writersnetwork @writerstolli @hindiwriters @hindinama

    Read More

    ना कर गलती यूं मझधार में छोड़ जाने का
    जहां से.. किनारा भी ना दिखे और सहारा भी..!!
    "TRY TRY BUT DON'T CRY"
    ©soonam

  • soonam 2w

    एक और हमेशा की तरह अब ये साल बीत रहा
    किसी का कुछ अपना छुट गया
    किसी ने कुछ पा लिया
    ये कुछ पाना और खोना
    सिलसिला है जिंदगी का
    किसी ने दुःख देखा
    तो किसी ने सुख का आनंद लिया
    ये सुख भरा.. दुःख भरा..
    प्यार भरा या परेशानियों से घिरा
    चाहे जैसा भी साल बिता हो
    हमारे जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है
    जिसे मिटाने पर भी नहीं मिट सकता
    तो चलो.. अच्छा-बुरा जैसा भी हो
    अब इस साल से भी विदा लेते है
    और आने वाले साल का
    एक बड़ी स्माइल के साथ
    प्यार.. विश्वास.. एक नई उम्मीद से स्वागत करते है..!!
    ©soonam

    @writersnetwork @writerstolli #happynewyear2022
    #welcome2022

    Read More

    Bye-Bye 2021 &
    Welcome 2022
    ©soonam

  • soonam 13w

    बनो तो ऐसे मेघ बनो
    सबके सिरों के शेख बनो..!!

    जैसे..बरस कर सबको तृप्त करुं मैं
    तो..जलती धूप में छाया
    प्यासों का अमृत बन
    सबके मन को भाया..!!

    ना किया अभिमान खुद पर
    निस्वार्थ प्रेम से मदद करुं
    सिंचित कर भूमि को खुद से
    किसानों के मेहनत का रंग बनूं..!!

    जहां जाऊं उनमें मिल जाऊं
    एकता का मैं पाठ पढ़ाऊं
    दो रुप मेरे जीवन के
    सफेद स्वच्छ बन हवा संग उड़ जाऊं
    अपने कर्तव्य से घिर काला पर जाऊं
    उचित समय आने पर मैं
    सबके ऊपर गरज-बरस जाऊं..!!
    ©soonam


    @writersnetwork @writerstolli @hindiwriters @hindinama

    Read More

    रहेगी प्यासी ये तेरी धरती
    ऐ मेघ.. तेरे बिना
    सूरज चांद का भी तू ही ठिकाना ।
    तेरे बिना सब उजड़े से होंगे
    पूरी धरती और ये जमाना..!!
    ©soonam

  • soonam 16w

    जो तेरे जहन से मेरे रुह को
    चूम कर मुस्कुराती है
    तेरे होठों की हंसी से सवेरा होने तक
    उन आंखों की मासूमियत में शामें ढल जाती है
    उन लम्हों को अपने पन्नों में उतारना चाहती हूं..!!

    मैं लिखना चाहती हूं.. हमारे उन पलों के बारे में
    जहां तेरे एक झलक से
    मेरे इस दिल में वो चांद
    जैसे मानों अपनी चांदनी बिखेर देता है
    और तेरे ना होने पर वो अमावस्या में रुखसत हो जाता..!!

    मैं लिखना चाहती हूं.. तेरे
    उस बंधन की गर्माहट को
    उन गीले बिखरे बालों के
    छींटों की नर्माहट को..
    तेरी प्यारी सी मुस्कराहट में
    छुपी तेरी शरारतों को..
    तेरे आंखों के इशारों को
    जो ना कहते हुए भी
    हामी भर जाती है..!!

    मैं लिखना चाहती हूं..
    कि जैसे बिन सांसों के घुटन
    कुछ वैसी लगती है जिंदगी तेरे बिना..
    बिन मोतियों के अधूरी शुक्ति सी लगती है जिंदगी तेरे बिना..
    कि तुम वो दरिया हो.. जहां
    उन किनारों पर ठहर
    पूरी दुनिया खुबसूरत सी लगती है..!!

    हां , मैं लिखना चाहती हूं..
    उस खुदा से दुआओं में
    तुझे मांग कर
    पूरी दुनिया अपनी
    तेरे साथ बसाना चाहती हूं..
    कि तुम वो आसमां हो
    जिसमें खुद को सिमेटना चाहती हूं..
    वो इबादत हो.. जहां
    शिद्दत से हर बार सर झुकाना चाहती हूं..❤️
    ©soonam

  • soonam 19w

    जिंदगी से आखिरी मुलाकात कुछ यूं हो
    कि तेरा गोद और मेरा सर हो..
    ताउम्र जिस प्यार को तरसती रही मैं
    आखिरी सांस.. तेरे हाथों में मेरा हाथ..
    तेरे-मेरे होंठों पर खिलखिलाती हंसी के साथ
    मेरी ये जाॅं खत्म हो..!!❤️
    ©soonam

  • soonam 21w

    देखो..
    आज तुम्हारी कविताओं की
    शीर्षक बन रही हूं मैं..!

    शनै: - शनै:
    तेरे नक्ष-नयन में बस रही हूं मैं
    अपना सर्वत्र त्याग
    तुझे पूर्वत्र कर रही हूं..
    तेरी अर्धांगिनी बन..
    तेरे जीवन को नया रुख दे रही हूं मैं
    देखो.. आज तुम्हारी कविताओं की
    शीर्षक बन रही हूं मैं..!!

    गुलाब की पंखुड़ियों-सी बिछ
    तेरी जीवन को सुगंधित कर
    तेरे अतः करण में बस
    तेरे प्रेम में खुद को पिरो रही हूं मैं
    मेरे चित्त के चितचोर बन
    मेरे प्रेम रस में डूब
    खुद को सराबोर कर रहा है तू
    देखो..
    आज मैं तुम्हारी कविताओं की शीर्षक
    अपितु उसे पूर्ण भी करुंगी मैं..!!
    ©soonam

  • soonam 29w

    21st के जमाने में
    19th century वाला प्यार ढूंढ रही हूं..
    वही अनकही इशारों वाली बातें
    और बेशुमार इकरार ढूंढ रही हूं..!!

    मैं ये नहीं कह रही..
    वो.. हर रोज Video calls or Calls पर
    अपनी attendence लगाए..
    किसी अच्छे से restro में
    Lunch, Dinner करवाए..
    मेरे लिए Love Letter लिखे
    या.. रोज नए नए gifts देकर
    मुझे बहलाए..!!

    पर हां.. बस इतना कि..
    जब भी हमारी बातें हो..
    मैं उसमें और वो मुझमें खो जाए..
    वो जो भी खाएं..
    बस वही.. मुझे अपने हाथों से खिलाएं
    Letters और Gifts ना सही
    बस वो.. हर पल
    अपने होने का एहसास करा जाए..!!

    हां माना..
    BMW और Marcedes के जमाने में
    2 Seater Bullet वाला ढूंढ रही हूं..
    iPhone pro X/MAX के जमाने में
    मैं वही.. Samsung Nokia ढूंढ रही हूं..!!

    5g के जमाने में
    WiFi connection वाला साथ ढूंढ रही हूं..
    पता है.. दिक्कतें आएंगी हजार
    लेकिन फिर भी.. मैं वही
    दिल से दिल का सच्चा वाला
    Connection strong ढूंढ रही हूं..!!

    हां.. बेशक.. इस..
    फटी jeans , sexy shirts के जमाने में
    मैं वही.. कुर्ते पैजामे और formal
    वाला साथ ढूंढ रही हूं..
    Hi-fi Dates और Luxurious gifts के जमाने में
    मैं वही.. Simple और Sober
    वाला प्यार ढूंढ रही हूं..!!
    ©soonam



    @writersnetwork @writerstolli @hindiwriters @hindinama

    Read More

    इन फरेबों के समुद्र में
    सच्चे प्यार का किनारा ढूंढ रही हूं..
    इस मैं और तू के जमाने में
    मैं.. हम वाला प्यार ढूंढ रही हूं..!!
    ©soonam

  • soonam 31w

    मैं तुम्हें फिर मिलूंगी..
    तेरी सांसों में
    तेरी एहसासों में..
    तेरे अंदर के हर जज़्बातों में..
    मैं तुम्हें फिर मिलूंगी..

    उस चांद की चांदनी में
    सूरज की किरणों में
    बारिश की हर एक रिमझिम सी बूंदों में
    जो तेरे तन से होकर गुजरेंगी
    वो तो गुजर जाएंगी पर..
    पर.. पर मैं तुझमें ही समा जाऊंगी
    कि तुम्हें फिर मिलूंगी

    तेरे आंखों में बसी
    सिर्फ मेरी ही तस्वीरें होंगी
    तेरे लबों के हर अल्फाज में
    बस मेरी ही जिक्र होगी
    तेरी कानों में गूंजती
    इक मेरी ही आवाज होंगी
    मैं तुम्हें फिर मिलूंगी..!!

    तेरी खुशी में मुस्कान बन
    तेरे होंठों से लिपट जाऊंगी
    तेरे दुखों में अश्रु बन
    तेरे आंखों से छलक जाऊंगी
    तेरे दिल के हर धड़कन में
    मैं ही गुनगुनाऊंगी..
    कि.. तेरे हर लड़खड़ाते कदमों में
    तेरा हाथ थाम जाऊंगी..
    तू गर.. ना चाहे भी
    तो भी.. बड़ी बेशर्मी के साथ
    तुम्हें याद आऊंगी
    कब.. कहां.. किस तरह.. यह सब तुम्हें पता है
    कि..मैं तुम्हें फिर मिलूंगी

    वक्त को चीर कर
    फासलों को मिटा कर
    तुम्हें आना होगा
    अपने उन हाथों की लकीरों में
    मेरा हक बनाना.. और..
    मुझे खुद से जोड़ कर
    जन्मों जन्मों का साथ निभाना होगा..।
    कब.. कहां.. किस तरह.. यह सब तुम्हें पता है
    बस एक ठंडी आह भरने की देरी है
    मेरी इश्क की गर्मी
    मेरे होने का एहसास करा देंगी
    बस तुम्हें अपने अंदर
    मुझे समेटने की देरी है..
    मैं तुम्हें हर जगह मिलूंगी
    कि मैं तुम्हें फिर मिलूंगी..!!
    @soonam


    @writersnetwork @writerstolli @mirakeeworld @hindiwriters @hindinama

    Read More

    अभी चाहें कितनी भी दूरियां हो
    ये दूरियां ही
    हमारी नजदीकियां बढा़एंगी
    और एक दिन
    हमारे मिलने का कारण बनेंगी
    हर वक्त तेरा साया बन
    तेरा सहारा बनूंगी..
    कि.. मैं तुम्हें फिर मिलूंगी..!!
    ©soonam

  • soonam 39w

    सदियों बीत गए
    यूं जात-धर्म के नाम पर
    लेकिन लड़ते हैं आज भी सब
    मंदिर-मस्जिद के नाम पर..!!

    हां..माना कि मिलता है सुकूं
    उस जगह पर समय बिताने में
    लेकिन करें क्या उस सुकूं का
    जो बनती है..
    लाखों लोगों को मिटाने से..!!

    अरे बस करो.. बस करो अब..
    देखो तबाही आई है
    जिसके लिए लड़े थे हम
    आज वही बंद पड़ी है..
    बिखरे हैं आज हम
    और साथ देने वाला कोई नहीं है..!!

    देखो.. ये हमारी ही लापरवाही का नतीजा है
    जूझ रहे हैं सारे इस महामारी से
    अब मर रहे हैं लोग इस बिमारी से..!!

    अरे.. अभी भी समय है
    डरो.. डरो अब क्योंकि..
    मौत सामने आ गई है
    पछताओ नहीं..
    अब सीखो.. सीखो अपनी ही गलतियों से
    सतर्क रहो और बरतों सावधानियां
    बंद करो अब दूसरों को कोसना
    और अपने आप पर ध्यान दो..!!
    ©soonam


    @writersnetwork @writerstolli @hindiwriters @hindinama

    Read More

    .





    . ©soonam

  • soonam 40w

    समझ क्या रखा है तुमने
    अपने हाथ की कठपुतली
    अरे.. नारी हूं मैं , शक्ति हूं मैं
    अपने कर्म की भक्ति हूं मैं
    न समझ तू मुझे..
    अपनी हाथ की कठपुतली..!!
    जब चाहा सवार दिया
    जब चाहा मार दिया
    पल पल अपने जरुरतों के लिए
    अपने रुप में ढाल दिया..
    अरे.. भूल मत.. भूल मत तू..
    अरे..काली हूं मैं, चंडी हूं मैं
    तुझको जीवन देने वाली
    इस जग की जननी हूं मैं
    अरे..क्या समझ रखा है तुमने
    अपने हाथ की कठपुतली..!!
    ©soonam


    @writersnetwork @writerstolli @mirakee @hindiwriters @hindinama #narishakti

    Read More

    .






    ©soonam