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Reposts
  • soulful 7w

    Khamoshiyan kehna chahti hain bahut kuch
    Bas dil se koi sunane wala chahiye

    ©soulful_ritu

  • soulful 12w

    On a lazy summer beachy afternoon
    I was treading way back home
    In a coffee shop near the shore
    I saw you from a distance
    Sipping coffee alone with a phone 
    I started walking towards you
    My heart's desires come to play
    I covered your eyes with my hands 
    And gigglingly did a peek-a-boo
    You caught my hands in yours
    Kissed them with love and care
    When I swayed to embrace you
    I could not find you and realised
    I was just thinking about you 
    Suddenly I felt lonely and badly missed you
    Hearing the sea songs from the far away deck 
    I started marching again to the waterside
    Adjusting the headgear and big shades
    To cover my moist longing eyes ️️

    ©soulful_ritu

  • soulful 12w

    एक झलक देखकर तुझे
    दिन भर की थकान मिट जाती है
    मेरे मर्ज़-ऐ-इश्क़ की दवा
    बस तुम ही हो ♥️

    ©soulful_ritu

  • soulful 12w

    Hope smiles
    Flowers blossom
    In the garden of arduous life
    Revering highs and lows of everyday
    Affirming positivity
    Reaping happiness
    We sow

    ©soulful_ritu

  • soulful 12w

    उनकी नज़रों का तीर लगा सीधा मेरे दिल पर कल,
    हाल पूछते हैं वो मेरा उन्हीं क़ातिलाना नज़रों से आज,
    संभाला था थोड़ा इस दिल को मैंने बेक़ाबू हो चला फ़िर ये अब !

    ©soulful_ritu

  • soulful 12w

    #स्त्री #woman #marriage

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    विवाह का अर्थ क्या है? क्या सच में ये कोई रिश्ता है या सिर्फ़ दो लोगों को ज़िन्दगी भर के लिए एक दूसरे को झेलने का सफ़र। एक ऐसा सफ़र जिस में किस पुढाव पे क्या करना है वो पति बताता है और पत्नी वैसे ही करती है। ये एक स्त्री की ज़िंदगी की बागडोर किसी और के हाथ पकड़ाने के सिवा कुछ नही।

    आख़िर ऐसा क्यों? क्या ऐसा सिर्फ़ इसलिए क्योंकि वो आर्थिक रूप से किसी पे आश्रित है। विवाह भी फिर तो लेन देन ही है जहां स्त्री को ज़िन्दगी भर के लिए खरीद लिया जाता है वित्तीय सुरक्षा के नाम पे। 

    उसके अपने सपने कुछ मायने नही रखते। उसके सपने उसके अपने माँ बाप ही तोड़ते हैं और सिर्फ़ इसलिए क्योंकि वो उसे ज़िन्दगी भर के लिए आर्थिक सुरक्षा नही देना चाहते क्योंकि उनको लगता है कि उनके जाने के बाद उसका क्या होगा। वो ये नही सोचते कि उसको पढ़ा लिखा कर आत्मनिर्भर बना कर वो अपनी और बेटी की ज़िंदगी को सुरक्षित कर सकते हैं।

    जब वो आत्मनिर्भर बनेगी तो ही खुश रहेगी। स्त्री की ज़िंदगी के भी कुछ मायने हैं। विवाह के बाद बच्चों को जन्म देकर सिर्फ़ घर संभालना ही उसका काम नही। उसके अंदर भी कुछ तमनाएँ होती हैं जो उसको खुशी देती है और उसको जीने की इच्छा प्रदान करती है।

    वो क्या पहनेगी, क्या खायेगी, उसका दिन कैसे बीतेगा वो ख़ुद तय करना जानती है। लेकिन उसको अक्सर ऐसा माहौल और मौक़ा नही मिलता। वो कब उठेगी, सोएगी, खायेगी, पीयेगी सब दूसरों पे निर्भर करता है। उसका दिन उसके अपने लिए नहीं बल्कि घर परिवार के लिये और दूसरों के हिसाब से तय होता है। 

    क्या स्त्री के अंदर दिल और जज़्बात नही होते? काबलियत नही होती अपने सपने पूरे करने की। क्या उसका जन्म परिवार वालों के सपनों को पंख लगने के लिए ही हुआ है जबकि उसके अपने पर काट दिए जाते हैं। 

    अपने विचार नीचे comment section में बताएं
    ©soulful_ritu

  • soulful 13w

    मैं आईना हूँ
    तू देख अपना अक्स मुझ में
    ख़ैर जाने दे
    ना सह पायेगा हक़ीक़त अपनी
    फ़िर क्यों है
    तू ख़फ़ा मुझसे
    ख़ैर छोड़ ये
    सिलसिला यहीं अब तू
    बस जाने दे!

    ©soulful_ritu

  • soulful 18w

    I aspire to live life of my own
    With no regrets ,
    I dismay shackles of dominance
    In pain and fear ,
    I desire to feel freedom I owe myself
    With no remorse,
    Because I am a Woman radiating life and
    Blissful cheers !

    ©soulful_ritu

  • soulful 18w

    शिव की शक्ति का हरपल आभास करूं
    उसकी महामाया का क्या व्याखान करूं
    सब जानें उसकी लीला है अपरंपार
    उसके ताण्डव से डरे सम्पूर्ण संसार
    सुन! भोलेनाथ है कैलाशपति
    प्राथर्ना तुझसे मेरी बस एक ही
    निःस्वार्थ तेरी भक्ति में रहूँ मैं लीन
    कृपा करो मुझ पर हे प्रभु गिरीश
    महादेव सदा रहना तुम संग मेरे
    ओम्कारेश्वर सुनो मेरी ये विनती
    ©soulful_ritu

  • soulful 21w

    किसी ने सच ही कहा है
    कि तस्वीरें भी बोलती हैं
    कल मैंने बहुत सी बातें की
    तुम्हारी तस्वीर से
    तुम कुछ उदास से लग रहे थे
    शायद तुम भी मुझे याद कर रहे थे
    लेकिन फ़िर भी हमेशा की तरह
    अकड़ू बने पहल करने से हिचक रहे थे
    बस मेरी मुस्कान की ही प्रतीक्षा कर रहे थे
    यही सब किस्से याद करके
    जैसे ही मेरे होंठों पे हँसी आई
    तो तुम्हारी तस्वीर के भी कुछ भाव बदले
    लो हमारी नोकझोक हमेशा की तरह शुरु हो गई
    मन ही मन कुछ बात मैंने कही तुम से
    तो तुमने भी अपने दिल का हाल जताया
    पता नहीं कब मेरी आँख लग गई और मैं सो गई
    जब से सो कर उठी हूँ बस
    तुम्हारे फ़ोन का ही इंतज़ार कर रही हूँ
    जबकि मुझे पता है आज भी तुम
    कौन सा कॉल करने वाले हो
    मैं जो रुठी हूँ तुम कौनसा मनाने वाले हो
    काश! कभी तो तस्वीर से निकल कर
    मुझ से कुछ कहो
    झगड़ना ही है तो वो ही सही
    कुछ आगाज़ तो कभी करो !

    ©soulful_ritu