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  • soulful_scriptings 13w

    यही अगर आख़िरी सितम हो तो फिर पिलाओ।
    शराब पीने से दर्द कम हो तो फिर पिलाओ।

    मुझे शराबी कहेगी दुनिया ये ग़म नहीं है।
    अगर जो साक़ी भी बेशरम हो फिर पिलाओ।
    - अंश।

  • soulful_scriptings 16w

    मुझे नहीं है हिसाब कितनी।
    फ़िराक़ में पी शराब कितनी।

    ये पूछो तुम खाली बोतलों से
    ये तुमको देंगी जवाब, कितनी।

    कहाँ गया वो पिलाने वाला..
    जो पूछता था, जनाब कितनी?

    वो पी रहे हैं जो कह रहे थे।
    शराब है ये ख़राब कितनी।
    ©soulful_scriptings

  • soulful_scriptings 21w

    दिल लगाने की मुसीबत जानते हैं।
    हम मुहब्बत की हक़ीक़त जानते हैं।

    प्यार थ्योरी में सरल लगता है लेकिन..
    प्रैक्टिकल वाले हक़ीक़त जानते हैं।
    ©soulful_scriptings

  • soulful_scriptings 25w

    ज़िंदगी अब चैन से मरहूम है।
    रात भर सोए नहीं मालूम है।

    डाँटिए मुझको मेरी गलती भी है।
    दिल मगर मेरा बहुत मासूम है।
    ©soulful_scriptings

  • soulful_scriptings 27w

    रास्ते में जो मिलेगा।
    रास्ते में छोड़ देगा।

    ये मुहब्बत का तमाशा..
    उम्र भर थोड़ी चलेगा।

    मैं तुम्हें फिर दोस्त बोलूँ?
    इश्क़ को कैसा लगेगा!

    आग बुझ जानी है इक दिन..
    दिल भला कब तक जलेगा।

    इश्क़ करके देखिए ना।
    ख़ुदकुशी का दिल करेगा।

    बुतकदे में क्या रखा है।
    मयकदे में सब मिलेगा।
    ©soulful_scriptings

  • soulful_scriptings 31w

    रुक अगर सकती घड़ी दोस्त।
    रोक देते ज़िंदगी दोस्त।

    जा रहा हूँ दूर तुझसे।
    है मेरी ये बेबसी दोस्त।

    है तेरी-मेरी कहानी।
    जो है मेरी शायरी दोस्त।

    आँख मेरी हो गई नम।
    बात तेरी जब चली दोस्त।

    ज़िंदगी है बस मुहब्बत..
    और तेरी दोस्ती दोस्त।
    ©soulful_scriptings

  • soulful_scriptings 31w

    दिल के सबसे
    अंधियारे कमरे में बैठे तुमको
    जब मैं खिड़की से आवाज़ लगाऊँ तो
    तुम दरवाज़े तक आ जाना।
    हम बात करेंगे।
    मैं तुम्हें बताऊँगा..

    फुलवारी में क्या गुल खिले हैं
    इंद्रधनुष से क्या रंग मिले हैं।
    क्यों कोयल कौवे पे हँसती है।
    मैना क्यों मनमानी करती है।
    कलियों ने जो खत भेजा है।
    भँवरों ने उसमें में क्या लिखा है।
    मैं सब बतलाऊँगा..

    तुम मुझे बताना..
    परछाई से क्या बातें करती हो।
    सन्नाटे में क्या सपने बुनती हो।
    काँटों की क्यारी कैसी है?
    पतझड़ की यारी कैसे है?
    क्या बंजर में कोई गुल खिला है?
    मेरे जैसा कोई और मिला है?
    सब बताना,
    बिलकुल जैसे शाम ढले..
    रात और दिन क्षण भर के लिए मिलते हैं।
    हम और तुम भी इक लम्हा साझा कर सकते हैं।

    Read More

    दिल के सबसे
    अंधियारे कमरे में बैठे तुमको
    जब मैं खिड़की से आवाज़ लगाऊँ तो
    तुम दरवाज़े तक आ जाना।
    हम बात करेंगे।
    मैं तुम्हें बताऊँगा..

    फुलवारी में क्या गुल खिले हैं
    इंद्रधनुष से क्या रंग मिले हैं।
    क्यों कोयल कौवे पे हँसती है।
    मैना क्यों मनमानी करती है।
    कलियों ने जो खत भेजा है।
    भँवरों ने उसमें में क्या लिखा है।
    मैं सब बतलाऊँगा..

    तुम मुझे बताना..
    परछाई से क्या बातें करती हो।
    सन्नाटे में क्या सपने बुनती हो।
    काँटों की क्यारी कैसी है?
    पतझड़ की यारी कैसे है?
    क्या बंजर में कोई गुल खिला है?
    मेरे जैसा कोई और मिला है?
    सब बताना,
    बिलकुल जैसे शाम ढले..
    रात और दिन क्षण भर के लिए मिलते हैं।
    हम और तुम भी इक लम्हा साझा कर सकते हैं।
    ©soulful_scriptings

  • soulful_scriptings 32w

    ...

  • soulful_scriptings 33w

    Khuddari - self-respect
    Zarooratmand - needy
    Shamsheer - Sword
    Zanjeer - Chain

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    किसी खुद्दार की खुद्दारियों पर तीर मत खींचो।
    मदद करके ज़रूरतमंद की तस्वीर मत खींचो।

    ज़माने को मुहब्बत की ज़रूरत है बहुत ज़्यादा।
    ख़फ़ा हो तो करो झगड़ा मगर शमशीर मत खींचो।

    मैंने दिल से छिपाई हैं सभी मजबूरियाँ अपनी।
    मुझे पत्थर से मारो पर मेरी ज़ंजीर मत खींचो।
    ©soulful_scriptings

  • soulful_scriptings 33w

    kHizaa.n - Autumn
    Fasaanaa - Myth
    Bhanwar - Tide

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    हर इक मौसम सुहाना है तुम्हारे साथ।
    ख़िज़ाँ क्या है फ़साना है तुम्हारे साथ।

    भँवर हो या कि तूफ़ाँ हो, यहीं हैं हम।
    हमें उस पार जाना है तुम्हारे साथ।
    ©soulful_scriptings