suryamprachands

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  • suryamprachands 4d

    Totally random one...

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    आज है गर कत्ल कोई
    कल कोई माफ़ी नहीं क्या?

    ख़ून गंदा हो गया गर !
    इश्क़ है साफ़ी नहीं क्या?

    क्या ज़रूरत मौत की है!
    जिंदगी काफ़ी नहीं क्या?

    आँसुओं से कल्ब धुलना!
    कल्ब इत्लाफ़ी नहीं क्या?

    हाय! चुप्पी हुकूमत की
    गज़ब इंसाफ़ी नहीं क्या?

    सुन के नजरें झुका लेना
    हुक्म एतराफी नहीं क्या?

    © सूर्यम मिश्र

  • suryamprachands 1w

    हम मतलब ऐसा कुछ लिख ही नहीं पाएंगे तुमपे कि जो बहुत सुंदर या ऐसा हो जो पहले कभी नहीं जैसा हो, लेकिन हां ये ज़रूर लिखेंगे कि तुम हमायी प्रिय छोटी बहन हो। तुमसे जो अपनत्व और आदर मिलता है ना, वो इतना सौम्य और शीतल होता है कि वो अथाह की परिधि से परे हो जाता है।

    अत्यंत उत्साह और स्नेह के इस, ना सिर्फ़ तुम्हारे बल्कि मेरे और वो सभी लोग जो तुमसे स्नेह रखते हैं, उन सबके इस विशेष दिवस पर मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ की वो तुम्हें सदैव अनहद स्नेह, हर्ष,समृद्धि, सुस्वास्थ्य से अभिषिक्त रखें, दीर्घायु करें

    बाकी हमायी पार्टी वाली बात तौ पतै है तुमको, रही तुम्हाई जलेबी वाली बात तो ऊ हमका याद ना है,

    जन्मदिन की खूब शुभकामनाएँ अनु, जुग जुग जियो मोर बच्ची ��������������������������

    Happy birthday @shayarana_girl Anu bachchiii

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    Quiet as a flower and
    pretty as a doll.
    Your words are like,
    some sugary squall.

    You means a creation,
    cute and complete.
    Beyond the words of
    praise,
    sweet over sweetness
    of sweet.

    May God bless you,
    May you live longer,
    Years keep passing
    to make you stronger.

    I've only words to give,
    and a lot to say.
    And a prayer to pray,
    you may grow up, day by day.

    May you be happy
    and make all your problms shabby,
    But one thing, give me
    the party,
    I'll be there with your jalebi.

    - Your Suryam bhaiya

  • suryamprachands 2w

    था वो, मजबूर या मगरूर, दिल में भर लिया जाए
    गुनाहों से,...निगाहों के,...ज़रा सा डर लिया जाए
    है उसने जान बख़्शी, कत्ल करके, मान लो सूर्यम
    जगह दिल में ना आंखों में गुज़ारा कर लिया जाए

    ©Suryam Mishra

  • suryamprachands 3w

    ❤️

    वो अविरल काले, केश पाश
    वो तीर नयन, वो मधुर हास
    वो मौन अधर हैं, किंतु मुखर
    वो वाचाली दृग,...रम्य,प्रखर
    वो अधरों का,... उन्मुक्त मेल
    उनमें शब्दों का,...सूक्ष्म खेल
    इन सबमें ये चित्त उलझ कर कहीं खो गया
    हमको लगता प्रेम हो गया, हमको तुमसे प्रेम हो गया

    मन.....तुमसे बतियाना चाहे
    साथ बैठ कर.... खाना चाहे
    प्रेम इसे ही.....कहते शायद
    जग भर में है..बड़ी कवायद
    कुछ तो तुमसे,.कहना है पर
    अपनी हद में,...रहना है पर
    तुमको देखा सच कहता हूँ ये उच्छृंखल हृदय सो गया
    हमको लगता प्रेम हो गया, हमको तुमसे प्रेम हो गया

    © Suryam Mishra

  • suryamprachands 3w

    Poetry ❤️

    When the whole world goes,
    in the abyss of dreams.
    When the mirk starts to kill,
    this starved world's screams.

    When the sky pours,
    infinite peace on the road.
    When the fidelity becomes
    allusion,
    and starts to make mind it's
    abode.

    Then somewhere on earth,
    some melodies born.
    Most of them are joyous,but
    some of them are deadliest
    mourn.

    These melodies turn into a
    tornado, in a creature's brain.
    and this swirling storm emits,
    sometimes gaiety and some-
    times a terrible pain.

    It all settles down,with a little
    ink on a page.
    And that's how a wordsmith
    makes, a beautiful garland of
    words, for the world to gaze.

    -© Suryam Mishra

  • suryamprachands 3w

    ऐसे ही.....

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    ❤️

    Your soul turns white, when you start to feel blue.
    Am I right ?

    ©Suryam Mishra

  • suryamprachands 3w

    पुनरावृत्ति

    नियति चाहे प्रतिष्ठित पथ में सदा कंटक बिछाए
    चक्षुओं का स्वप्न मोहक भले क्षण में उचट जाए
    चित्त होकर चित्त..कतिपय भीरुता के गीत गाए
    राग वो रण-त्यागने के मात्र,...अधरों पर सजाए
    शक्ति की समिधा चढ़ा तब, शौर्य हम भर लाएँगे
    हम फ़िर खड़े हो जाएँगे,हम फ़िर खड़े हो जाएँगे

    काल क्रंदन मान मंडित,......वंदना के शीश धाए
    जग तिमिर को, देवता कह,उठा आनन से लगाए
    पाप का परिमाप,....पुण्यों के हृदय में घर बसाए
    या कि उस दुर्बोध को बस,.निरावृत रहना सुहाए
    जब निराश्रित अश्रु के कण,..धरा को अपनाएँगे
    हम फ़िर खड़े हो जाएंगे,हम फ़िर खड़े हो जाएंगे

    प्रीति का उद्यान,.....उद्यमशील रहना भूल जाए
    नग्न नर्तन काल का वो,...प्रणय पुंजों में दिखाए
    वेदना ही वेदना बस,........चेतना को नोच खाए
    प्रीति शाश्वत देख ले ये मान मद,और लजा जाए
    ज्ञान बन अज्ञान से तब,.....युद्ध हम कर आएँगे
    हम फ़िर खड़े हो जाएँगे,हम फ़िर खड़े हो जाएँगे

    गगन अच्युत,.धूरि के एक धुँध से ही ना दिखाए
    अमर अंबर उड़ रहा हो,..तितलियों के पंख पाए
    पवन उर आलस्य धर कर,.कंपनों में सकपकाए
    वेदना ब्रह्मांड भर की,..प्रति श्रवण में आ सुनाए
    भ्रम बने जब जुगनुओं को,.अर्क को चोँधियाएँगे
    हम फ़िर खड़े हो जाएँगे,हम फ़िर खड़े हो जाएँगे

    ©सूर्यम मिश्र
    ©Suryam Mishra

  • suryamprachands 4w

    ♥️��

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    नित नए सब स्वप्न बुनकर, गर्त में जाता रहा मैं
    क्या कुटुंबी और क्या धन, सभी कुछ खाता रहा मैं
    निज हृदय विध्वंस कर, अपभ्रंश का भागी हुआ मैं
    गत-अनागत काल चक्रण में फँसा, दागी हुआ मैं
    मैं हूँ बैठा, ज्ञान,दर्शन,चेतना, सब नष्ट करके
    कौन अपना औ पराया, यही सब स्पष्ट करके

    मैं नियति के द्वार, याचक बन, खड़ा कब तक रहूँगा?
    मृत्यु धारण कर चुका हूँ, कहाँ किस किससे कहूँगा?
    कौन होगा,जो सुनेगा, मन से मेरे दग्ध मन को,
    या करेगा, स्नेह से स्पर्श, मेरे रुग्ण तन को?
    कौन समझेगा, ये मेरे हास्य का, वो करुण क्रंदन?
    कौन होगा जो करेगा, शीश मेरे मुक्ति मंडन?

    वेद जितनी वेदना, धर कर, हृदय बस चल रहा है
    कल्प भर से,.कल्पना का विष पिया अविचल रहा है
    चक्षुओं में अश्रु बैठे, नित नई कुंठा सजाए
    कौन हो जो, उन को छूने से, तनिक भी ना लजाए?
    प्रार्थना कोई सुने बस, व्यथोदधि उद्दाम ना हो
    जय पराजय सब है स्वीकृत,बस हृदय संग्राम ना हो

    बस हृदय संग्राम ना हो.........

    ©SURYAM MISHRA

  • suryamprachands 4w

    मीटर- 1222 1222 1222 122

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    ग़ज़ल

    गया बेकार फ़िर, ये आँख का ज़मज़म हमारा
    हुआ गुमनाम फ़िर वो कल्ब करके नम हमारा

    फकत हर बार अपने ही किसी ने,. दर्द बख्शा
    कभी गर दर्द हो पाया ज़रा भी,... कम हमारा

    तवक्को थी हमें भी कि,...रहेंगे बन के हमदम
    बड़े ही दम से हमदम ने,. निकाला दम हमारा

    मलाज़ो में ज़रा भी ठौर, मिल पाया ना हमको
    खुदा घर यार सोचें,.क्या ही हो मक़्दम हमारा

    मुआलिज,इस खुदा ने ,खूब ढ़ाया कहर मुझपे
    किया फ़िर से यहाँ बर्बाद, सब दमखम हमारा

    बिना गज़लों के यूँ तो बात हो सकती नही थी
    पड़ा चुप-चाप है,... बेजान हो "सूर्यम" हमारा

    ©SURYAM MISHRA

  • suryamprachands 8w

    जय शिव....����

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    शिवस्तुति

    नमामीश शंभुं,......त्रिकालं नमामिं
    महाकाल कालं,......कृपालं नमामिं

    महेश्वर सुरेश्वर........श्री संतापहारी
    प्रभो चंद्रशेखर.........भुजंगेशधारी
    जटाजूट शंभो त्रयं.........ताप हारी
    दिगंबर दिशाधिप,.....प्रणम्यं पुरारी

    ललाटाक्ष मोहक कृपानिधि जटाधर
    परमवीरभद्रं......कपर्दी......धराधर
    महादेव भूसुर,..मृत्युंजय अचर-चर
    स्वयं शून्यनंतं,....स्वयंभू क्षर-अक्षर

    नमो चारुविक्रम,..जगद्व्याप्त शंकर
    सुखं सृष्टि मूलं,......सुपर्याप्त शंकर
    अनघरूप साशक्त,....अव्यक्त शंकर
    सदा शक्ति,..शाश्वत समनुरक्त शंकर

    गिरीशं नमो,........चंद्र भालं नमामिं
    महाकाल कालं,.......कृपालं नमामिं

    ©सूर्यम मिश्र