syaahiii

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kaise bichdun ki vo mujhme hi kahin rehta hai

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  • syaahiii 3d

    Zehen mere di kitaab padh lainda e
    O mainu hasa ke metho fer lad lainda e

    ©syaahiii

  • syaahiii 1w

    Lie decays the trust when love starts growing.

    ©Syaahiii

  • syaahiii 1w

    दायरे ऐसे भी

    जो निभाने ही हैं हर सूरत में कुछ वायदे ऐसे भी
    कुछ करने ही हैं सितम इश्क़ के कायदे ऐसे भी
    कैसे सीमित करूँ मैं इस अनंत प्रेम को ,
    कि क्या कहूँ दिल से , दायरे ऐसे भी

    उसमें ख़ामोशी उसी में कुछ राज़ ऐसे भी
    वफ़ा है दिल में मगर लब नाराज़ ऐसे भी
    कैसे सीमित करूँ मैं इस आती हुई गूंज को ,
    कि क्या कहूँ दिल से , दायरे ऐसे भी

    सहम ही जाएँ अगर हम न आएँ तो कुछ रोज़ ऐसे भी
    चिंगारी होकर मुझे दीप बताने वाले अफरोज़ ऐसे भी
    कैसे सीमित करूँ मैं इस सुर्ख आतिशी को
    कि क्या कहूँ दिल से, दायरे ऐसे भी

    सब्र सी मुस्कान लिए हुए गम विरान ऐसे भी
    वो दरिया हैं और नगमा भी एक शाम एसी भी
    कैसे सीमित करूँ मैं लहरों के उफान को
    कि क्या कहूँ दिल से , दायरे ऐसे भी

    परछाई से भी ज़्यादा करीब कुछ अक्स ऐसे भी
    माधुर्य दिल- गीत पर धड़कते कुछ रक्स ऐसे भी
    कैसे सीमित करूँ उभरते कला भावों को
    कि क्या कहूँ दिल से , दायरे ऐसे भी

    - नभा


    ©स्याही

  • syaahiii 1w

    Her pendulous ' ������������ ' found the
    stark silhouette of the voice beholding
    the salient call of intent more significant
    before she saw the hanged mellow painting .

    The beleaguered aura gently untie her hair and her
    feathery ' ���������� ' touching the soothness from her bursting acne
    [which feuds with the heavenly nose pin she wears]
    Solve the volatile issue obliviously.

    The ' ������������������ ' she sings describe that how she
    nurtures her poetries to save them from forlornness
    but never forgets that how this only enhanced
    her beautiful verses more benevolently.

    Her swallowed '���������� ' bear more than her poetries do
    but the blushing parchments whisper
    to her pen that she has became a wonderful
    poetess reflecting the journey of poets ,

    ©Syaahiii

    @fromwitchpen happy birthday laado ❤
    May abundance always be entwined with your wings.
    I wuv you. ��

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    //

    ~ ~ //

  • syaahiii 2w

    Dunno if it's proper awadhi or not still poured it down because I had to.
    दोहे भी नही पढ़े मैंने तो xdddd


    व्याख्या - देखो चंदा के प्यारे, लोग ईश्वर के नाम को जप कर उनको याद करने की चेष्ठा करते हैं | माना की तुम हरि जैसे मायावी नहीं हो पर हो तो हरि के अंश ही और मैं वो बैरागन हूँ जिसको जगत निहारता है |

    मेरे हृदय में तुम हो और मेरे धीर मन में भी तुम ही समाहित हो, जैसे कि मैं तुम्हारी ही नभा हूँ |
    न ही तो मैं तुम्हें स्मरण करती हूँ और न ही लबों पर तुम्हारा नाम रखती हूँ, तुम्हें स्मरण करने के लिए , क्योंकि मैं तो खुद को ही तुम्हें कुछ इस प्रकार हार चुकी हूँ कि तुम मुझमें अब पुरणतः व्याप्त हो |

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    देख चंदा प्यारे, लोक जपत हैं नाम हरि बिहारी
    अंश तू हरि को लागे , मैं बैरागन जगत निहारि

    हृदय - मन बासी तुमि प्रियतम , मैं ज्यों लागूं नभा तिहारी
    सुमिरन लब पर नाम तक नाही , त्यौं आपहु को पूरन हारी


    - नभा

    ©स्याही

  • syaahiii 3w

    ठिठुरति सी जिंदगी में मंद सी धूप कोई
    मेरे भ्राता आप अनंत सुकून का रूप कोई

    स्याही

  • syaahiii 3w

    खोना चाहती हूँ

    जिंदगी की भीड़ से दूर अपने
    दायरे में गुम होना चाहती हूँ
    तुम्हारी इस तन्हाई से एक
    दफ़ा यूँ रूबरू होना चाहती हूँ
    मैं तुम्हें तुम से मिला कर ,
    खुद को कहीं खोना चाहती हूँ

    ज़ख़्मों को तुमसे चुरा कर मैं ,
    बुरा ख़्वाब होना चाहती हूँ
    तुम्हारी कोमल जिल्द तले
    सुकून बनकर सोना चाहती हूँ
    मैं तुम्हें तुम से मिला कर ,
    खुद को कहीं खोना चाहती हूँ

    सब तुम्हारे नाम कर मैं,
    सयूरी हृदय की होना चाहती हूँ
    तुम्हारे लबों पर नहीं रक्ति जुनून
    की तरह रोना चाहती हूँ
    मैं तुम्हें तुमसे मिला कर ,
    खुद को कहीं खोना चाहती हूँ

    स्याह रात में ख़्वाब देकर मैं तुम्हें ,
    अपना मन मोहना चाहती हूँ
    पावित जल को देकर तुम्हारे
    राहों में प्रेम बोना चाहती हूँ
    मैं तुम्हें तुमसे मिला कर ,
    खुद को कहीं खोना चाहती हूँ

    खाहइशें पूरी होने का अनदेखा
    ज़रिया होना चाहती हूँ
    शृंगार कर रसों से प्रेम रस से
    आँचल भिगोना चाहती हूँ
    मैं तुम्हें तुमसे मिला कर ,
    खुद को कहीं खोना चाहती हूँ

    ~स्याही

  • syaahiii 4w

    मेरे खतों को देखनी तुम्हारी तन्हाई बाकी है
    मेरे लफ़्ज़ों को मिलनी उनकी रुस्वाई बाकी है
    हज़ार बार इज़हार हो और दिल तोड़ा जाए मुरीद का
    देखनी मुझे अभी इस एहसास की गहराई बाकी है

    स्याही

  • syaahiii 4w

    Paanven Mai tere hathan di lakeer kade ni c
    Paanven mai tethon door Haan kareeb kade ni c
    Par vekhi jo tu mainu eh apna challa bnaya e
    Enu kade taari na ve sajna mai peerh kade ni c

    Paanven mai tere muhre aan vala phull kade ni c
    Paanven Mai mehek c par enni majboor kade ni c
    Par vekhi jo teri deed aa kade udikna n chad deve
    Mai taan mureed haan ve sajna rakeeb kade ni c

    Paanven Mai tere pairan vall aaun vali leher kade ni c
    Paanven Mai parchai si teri par chaa vali rukh kade ni c
    Par vekhi rataan nu hanera na ho jave kite chn ch baithi
    Mai channa beshak haan sajna par badalda chan kade ni c

    Paanven Mai tere beete hoye ja naye aye saal kade ni c
    Paanven Mai tere vich hi si kite par tere naal kade ni c
    Par vekhi jo mai inj pal pal marke tere vich jiundi aan
    Mandi haan Mai rang laal haan sajna par daag kade ni c

    Paanven Mai tere bullan de utte saji muskaan kade ni c
    Paanven Mai tera dar c sehmaaun vala par ehsaan kade ni c
    Par vekhi jo e hanju haan eh vi meri badolat hi paye c tere
    Mai tainu vekh ke pareshan hundi c sajna par hairaan kade ni c

    ©Syaahiii ��

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    .

  • syaahiii 4w

    काश मैं तुम्हारी सभी उदासीनताओं को सोंख लूँ
    बस थोड़ी देर कहकर तुम्हें हमेशा के लिए रोक लूँ

    स्याही