tanika1998

love to read novels , poem and love to write.....#animal lovers #fairytaleworld

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  • tanika1998 24w

    ढूढेगा

    एक वादा है मेरा तुझसे
    तेरी हर एक शाम में मेरी यादों का जाम होगा
    तेरी ज़िन्दगी की किताब में मेरा नाम होगा
    तेरी हर सिगरेटें की कश में मेरा सरूर होगा
    ढूढेगा फिर तू मुझे हर गली में और कभी कभी तो तू अपनी हाथो की लकीरों से मेरा पता पुछेगा
    कभी मेरी सहेलियों से मेरी ख़ैरियत पुछेगा पर मुझे ना ढूढ़ पाएगा
    टूट के तू बिखरे गा उन टुकडो में तू मेरा चेहरा ढूढेगा
    तू किसी और का ना हो पाएगा तू खुद में मुझे पाएगा
    हर लडकी में तू मुझे ढूढेगा
    पर तु मुझे ना ढूढ़ पाएगा
    ये वादा है मेरा तुझसे
    कभी कभी खवाबों में मिला करुँगी
    तो कभी तुजे दूर खड़ी दिखूंगी
    तेरी दुआओं में मेरा नाम गूजे गा पर तु मुझे ना ढूढ़ पाएगा
    ढूढेगा तू मुझे हर एक गली में हर एक शहर पर पर मुझसे ना मिल पाएगा
    मिलूँगी में तुझसे बरसों बाद कभी जब तू मिट्टी के उस पर आया के मेरा नाम पुकारेगा
    ©tanika1998

  • tanika1998 25w

    कोई पुछे तेरी मेरी कहानी तो बता देना
    बेवफ़ा कहें के बात वही फ़िर दबा देना
    दिखे मेरी तस्वीर कभी तुझे तो उसे जला देना
    उसी के राख से मेरी यादो को मिटा देना
    आये तुम्हरी ज़िंदगी मे कोई और तो उसे हर एक निशान देखा देना
    बेवफ़ा कहें के बात फिर वही दबा देना
    ©tanika1998

  • tanika1998 41w

    राम

    रावण की प्रशंसा करने वालों को मैं श्री राम का परिचय देना चाहुगी
    अपने पिता का वचन निभाने के लिए राज दुआर ठुकराए था
    महलों का सुख चैन ठुकरा के एक कुटिया में समय बिताए था
    रावण को ज्ञानी कहने वालों को में मर्यादा पुरुषोत्तम राम के बारे में बताना चाहुगी
    राज धर्म के खतीर अपनी सीता तक को छोड़ा था
    और रावण ने तो एक स्त्री के लिए एक दुसरी स्त्री की इज्जत के साथ खेला था
    सीता को जो तुम ना चुन पर रावण की मरियादा का गुनगान जो तुम गाते हो
    क्यों तुम नलकूबर के श्राप का ज़िकर करना तुम भूल जाते हो रावण को भक्त कहने वाले को श्री राम जो संयम भगवान है याद दिलाना चाहोगे
    रावण को शक्तिशाली कहने वालों को एक बार रावण वद याद ज़रुर दिलाना चाहुगी।
    ©tanika1998

  • tanika1998 46w

    How do I tell him not to leave
    If he already decided it.

    How do I tell him not to lie
    When he lies all the time with me.

    How can I pray to God for us
    When God is still searching for words to complete our story.

    How can I say to my Destiny not to be upset
    When I am upset at myself

    How can I say to time to stop for me
    When I am separated from the world

    How can I listen to my beloved
    When my heart won't listen to me

    How can I collect my dream pieces
    When everything seems scattered

    How can I tell moon you are my favourite
    When something is missing inside me .
    ©tanika1998

  • tanika1998 64w

    देखी

    जिसे जान कहते थे उसे किसी और कि जान बनते देखा है
    जिन से कभी नज़रे नहीं मिलती थी हमारी ,हमने उन भी आँखे भर के देखा है ।

    खुद से बेवफ़ाई कर के मैंने खुद को देखा है ,
    ज़िन्दगी से रुठ के मैंने ज़िन्दगी को मेरी क़िस्मत से रूठते देखा है।

    हज़ारो की भीड़ में मैंने आज भी उसी को फिर से देखा है
    अरे यार ! मैंने ये क्या देखा है !

    वफ़ा कर के भी मैं ने वफ़ा को जाते और बेवफाई को आते देखा है
    अरे यार मैंने पता नही कितनो को बेवफाओं के लिए रोते देखा है ।

    मैंने कयामत से कयामत तक का ज़फर देखा है ,
    मैंने मोत को सहरने के पास बैठा देखा है ,
    और कभी कभी मैंने मोत को भी मोत का इंतज़ार करते देखा है ।

    अरे यार मैंने तो
    ज़िन्दगी के आख़िरी ज़फर में मैंने अपना पहला ज़फर देखा है
    सब से ज़रूर मैंने तो आज भी उसे वफ़ा की बाते करते देखा है।

    उसी के शहर के हर मौसम में उसकी हज़ारो हीर बदलती देखी है,
    अरे यार मैंने तो उसके बिस्तर में मोहब्बत मरती देखी है
    मैंने आज भी खुद को उसी का इंतज़ार करते देखा है

    ©tanika1998

  • tanika1998 64w

    हक़ीक़त से यारी नहीं ,
    खवाबों की दुनिया मे मैं रहती हूँ ।
    हक़ीक़त में नहीं पर ,
    ख्वाबो में ज़रूर तुम्हें अपना कहती हुँ ।
    दिन में तुझे अनजान कहती हूँ ,
    पर रात होते ही हर एक ख्वाब तेरे नाम करती हूँ ।
    हर शाम एक कागज़ पे तेरा नाम हज़ारो बार लिखती हुँ
    दिन होते ही उस कागज़ को खुद की नज़रों से कही दूर रखती हूं।
    फिर शाम होते ही फिर से उस कागज़ को अपनी हज़ारो अनकहीं बातों से सजाती हुँ ।
    ©tanika1998

  • tanika1998 71w

    बाते ❤️

    तुम्हारी बाते सिर्फ बाते थी ऐसा ज़िक्र अपनी कविता में किया है मैंने
    तुम्हारी बातो का और कुछ झूठे वादों का हिसाब लिखा है मैंने ।
    तुम्हारी बाते कुछ ऐसी थी कि
    मेरी आँखों का काजल कभी फैलने नही दोगे ऐसी बाते थी तुम्हारी।
    मेरे चेहरे का नूर मेरे आँशु से मिटने नही दोगे ऐसा वादा था तुम्हारा।
    मेरे होठो की लाली को उदासी से मिलने नही दोगे ऐसा कहना था तुम्हारा ।
    ऐसी हज़ारो बाते कही थी तुमने
    तुम टूटो गी तो बिखर मैं जाऊँगा
    तुम रूठो गी तो फिर मैं टूट जाऊँगा
    तुम जाओगी तो में खुद से अलग हो जाऊँगा
    ऐसी-ऐसी बाते थी तुम्हारी मैं दिल हर गई तुम पे ऐसी बाते थी तुम्हारी ।
    किसी शायर से कम नही किसी नज़्म से कम नही ऐसी बाते थी तुम्हारी।
    कोई सुनले और इश्क़ पे यकीन हो जाए ऐसी बातें थी तुम्हारी ।
    तुम्हारी बातो में हयात की झलक थीं
    ऐसी बाते थी तुम्हारी
    बांसुरी की धुन जैसी , सुरज की पहली किरन जैसी , रात की खामोशी जितनी गहरी बाते थी तुम्हारी ।
    बाते सिर्फ बाते थी तुम्हारी ।
    ©tanika1998

  • tanika1998 72w

    मैं तुमसे फिर मिलूँगी
    कही दूर खड़े तुम्हारा इंतज़ार करती दिखूंगी
    सब से दूर इस दुनियां से दूर कहीं तुझे ढूढ़ती हुई मिलूँगी
    किसी मन्दिर , मस्ज़िद में तुम्हें दुआ में माँगती दिखूंगी
    तेरा इंतजार करते तेरे घर के बाहर बैठी हुई दिखूंगी
    हाँ में तुम से फिर मिलूँगी
    कभी तेरी आँखों मे कभी तेरे आँशु में तो कभी तेरी किसी पुरानी किताब के पने में मिलूँगी
    तेरी अधूरी शायरी में तेरी सेही में फिर से तुम से मिलूँगी
    तुम्हारी महक में मेरी महक मिलेगी
    तेरे कमरे के हर एक कोने में मेरी झलक मिलेगी
    तेरे बिस्तर की सिलवटों में तेरे चाय के पायली में , तेरे हाथों की लकीरों में तुझसे फिर मिलूँगी
    ©tanika1998

  • tanika1998 87w

    आख़िरी सफ़र

    ख़ुद को ज़मीन में लेटा देख कर हैरान हुई थी मैं।
    पर उसे ज़्यादा अपनो को रोता देख कर परीशान हुए थी मैं ।
    क्यों मुझे सजाए जा रहा था।
    क्यों मुझे राम राम सत्य का पाठ सुनाए जा रहा था ।
    क्यों मुझे चार खादों पे उठाए जा रहा था।
    कैसा ये खेल था।
    जिस में मेरे अपनो को रुलाए जा रहा था।
    क्यों इतना शोर था।
    क्यों मुझे उठा के कहीं और लेजा रहे थे
    कैसा ये मंज़र था
    मेरे अपनो के हाथों ही मुझे जलाए जा रहा था
    मेरे शरीर को राख कर के
    मेरी रूह को कही ओर बुलाए जा रहा था
    ©tanika1998

  • tanika1998 90w

    वो

    मेरी सादगी उसे भाती है ।
    मेरी ज़ुल्फ़ें उसे उलझाती है।
    मेरी आवाज़ उसे गीत सी लगती है।
    मेरी आँखों मे उसके लिए दीवानगी सी झलकती है।
    कुछ अधुरा सा है वो , और अधुरी बातें वो करता है
    पर हर बात में मेरा ज़िक्र ज़रूर करता है ।
    ख़्वाब में तुम रहती हो ऐसी बाते वो अक्सर मुझसे कहता है।
    अपनी मोहब्बत बयां करने के लिए शब्दों की तलाश में रहता है।
    पर मोहब्बत लफ़्ज़ों में कहा ऐसा फिर वो कहता है।
    कुछ अधुरा सा है वो पर मेरा साधारण सा नाम भी बड़े प्यार से पुकारता है वो ।
    ©tanika1998