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  • tanmay5 15w

    #हिंदी #hindipoem

    Starting again after a long gap.

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    चुप ना रहो,
    अब कह दो दो शब्द
    हँस के तुम कह दो बस दो शब्द,
    कह दो की तुम भी थे उसकी तलाश में
    वो खड़ा है सामने
    तो चुप ना रहो,
    अब कह दो दो शब्द ।
    ©tanmay5

  • tanmay5 49w

    छत्रपति शिवाजी महाराज जयंतीच्या हार्दिक शुभेच्छा।

    #maratha
    #hindu
    #nation
    #sanatanadharma

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    राष्ट्ररक्षक

    हर हर महादेव का था स्वर प्रचंड
    मच गया था रक्त में तेज ज्वलंत,
    हृदय में विश्वास अटल ही था
    विलयतियों पर आया कहर ही था।

    थे वह सह्याद्रि के स्वामी
    पर हृदय में हिंदुत्व के रक्षक ही
    पौढ़प्रताप पुरंदर, क्षत्रियकुलावतंस
    सिंहासनाधीश्वर , राजाधिराज ,महाराज , योगिराज
    श्रीमन्त छत्रपति शिवाजी महाराज थे
    स्वराज्य के मुकुटमणि।

    जागो अब और बढ़ो आगे,
    उनके प्रताप से सीख लो तुम,
    समाज के लिए अपना जीवन का
    पूर्ण समर्पण कर दो तुम।
    ©tanmay5

  • tanmay5 54w

    Part 3

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    पानीपत ।।

    जो भी हो , मराठो के बलिदान के कारण व अब्दाली की आधी सेना के नाश के कारण अब्दाली नाना साहिब की दूसरी सेना से लड़ने के लिए नही रुका। नजीब को दिल्ली में सुप्रीम पावर मिल गया। परंतु माधव राव पेशवा के नेतृत्व में महाद जी scindhia ने धीरे धीरे चम्बल पार मराठा शक्ति को फिर स्थापित किया व 1772 में शाह आलम को उसका तख्त वापस दिलवाया। 1789 में नजीब के पोते ग़ुलाम क़ादिर को हरा कर पुनः शाह आलम को दिल्ली का ताज दिया और स्वयं रीजेंट ( नायब ) बन गए। राजपूतों व जाटों को भी मराठा संप्रभुता के अंतर्गत ले आए। अब्दाली को तो पंजाब से सिक्खों ने ही निकाल दिया।

    तो इससे यह साबित हुआ कि स्वधर्म के लिए लड़ना बहुत आवश्यक होता है। विजय और पराजय तो गोविंद देखते हैं।

    हर हर महादेव
    ©tanmay5

  • tanmay5 54w

    पानीपत ।।

    दत्ता जी शिंदे बुरारी घाट दिल्ली में अफगानों से लड़ते हुए मारे गए। तब सदाशिव राव भाऊ महाराष्ट्र से एक बड़ी सेना के साथ उत्तर में मुग़ल पादशाही की रक्षा के लिए आए परंतु सूरज मल जाट राजा के अलावा किसी शाशक ने उनका समर्थन नहीं किया। नजीब ने अवध के शूजा उद्दौला को इस्लामी कार्ड खेल के अपने साथ मिला लिया था। भाऊ साहिब को बाद में सूरज मल का साथ भी नासीब न हुआ क्योंकि दोनों एक दुसरे की शर्तों को नहीं मान रहे थे। सूरज मल आगरे का किला व दिल्ली के शहरी इलाके चाह रहे थे व इमाद उल मुल्क को वज़ीर बनाना चाहते थे परंतु सदाशिव को यह मंज़ूर ना था। इसके बाद भाऊ साहिब ने दिल्ली जीती और कुंजपुरा में अफगान किले को फतह किया। परंतु अब्दाली को यमुना पार करने से रोक न सके और दोनों फौजें पानीपत में आमने सामने आ गईं। दोआब में गोविंद पंत बुंदेले भी अब्दाली की रसद काटने में असमर्थ रहे व मारे गए। ऐसा में रसद न मिलने के कारण 14 जनवरी 1761 को भाऊ साहिब ने लड़ते लड़ते दिल्ली पहुँचना चाह परंतु शुरू के 4 घण्टों में मिली विजय से वे मराठो की जीत नज़दीक देख के सब लड़ने लगे। परंतु उसी समय विश्वास राव जो कि पेशवा का पुत्र था एक गोली लगने के कारण मारा गया, इब्राहिम खान गार्दी अपने तोप न चला सका क्योंकि मराठा टुकड़ियां उसके आगे लड़ने चली गई। उधर अब्दाली ने अपनी मिलीट्री पुलिस को लड़ने भेज दिया व भागे हुए सैनिकों को भी वापस भेज दिया। युद्ध हाथ से फिसलता देख मल्हार राव होलकर वहाँ से बाहर निकल जाट रियासत चले आये। मराठो की हार हुई , सदाशिव राव भी लड़ते लड़ते शाहिद हो गए। बड़े कष्ट के साथ कहना पड़ रहा है कि इतनी प्रयास के बाद भी सफलता प्राप्त नहीं हुई। अगर 1758 में ही नजीब को मल्हार राव ने मार दिया होता जैसा कि रघुनाथ राव व दत्ता जी चाहते थे तो ऐसा न होता। राजपूतों के आपसी झगडों में दखल के कारण जयपुर के राजा माधो सिंह व अन्य ने भी समर्थन नहीं किया।
    ©tanmay5

  • tanmay5 54w

    यह पानीपत के तीसरे युद्ध के संदर्भ में लेख है। सब राष्ट्रवादी लोगों को पानीपत के 3rd युद्ध से सीख लेनी चाहिए।

    #maratha
    #story
    #natinalism
    #war
    #glory

    Part 1

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    पानीपत ।।

    14 जनवरी 1761
    आज के हरियाणा में दक्षिण से आई हुई मराठा फौज के लिए इस दिन एक स्वर्णिम अवसर था। पर नियति की अटलता और भूत काल में हुए कुछ दोषों के कारण इस युद्ध का परिणाम अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण साबित हुआ। फिर भी कहा जाता है कि अगर मराठा लोगों ने अब्दाली को न रोका होता तो शायद दिल्ली में एक नया यवन/म्लेच्छ वंश शरू हो गया होता।

    कहानी को संशिप्त में कहूँगा। बाजीराव पेशवा ने सतारा में छत्रपति शाहू महाराज के सामने हिन्दू पद पादशाही की स्थापना करने का प्रस्ताव रखा जो कि छत्रपति शिवाजी महाराज का भी स्वप्न था। शाहू महाराज की रजामंदी के बाद 1740 तक गुजरात , मालवा व बुंदेलखंड मराठा स्वराज्य या हिन्दवी स्वराज के अंश बन गए। श्रीमंत नाना साहिब पेशवा के काल मे ओडिशा , दक्षिण में कर्नाटक के बड़ा भाग, निज़ाम के बहुत बड़े भूभाग व उत्तर में अट्टक व पेश्ववर तक हिन्दू साम्राज्य को बढ़ाया गया। मुग़ल को नाम मात्र के लिए सत्ता दे दी थी परंतु रघुनाथ राव के 1757 में हुए हमले में दिल्ली पर मराठो का वरचस्य स्थापित हो गया था। तब नजीब खान जो रोहिलखंड का नवाब था , उसने पुनः अहमद शाह अब्दाली को बुलाया ताकि मराठो को दक्षिण में भेजा जा सके। वैसे भी पंजाब गवाने के बाद व स्वयं भी आना चाहता था परंतु नजीब के कहने पर मराठा सेना के इंतज़ार में रुक गया क्योंकि वह लोग इस बार मराठा शक्ति को नर्मदा के दक्षिण में भेजना चाहते थे।


    ©tanmay5

  • tanmay5 54w

    छत्रपति शिवाजी

    सह्याद्रि के पर्वत से उठ गई प्रचंड जवाला थी,
    आदिल शाही की धरती पर छा गई डर की छाया थी,
    औरंगज़ेब भी थर्राया था, कुतब शाह भी काँपा था,
    शिवराय की शक्ति से यवन डर के भागा था।
    ©tanmay5

  • tanmay5 55w

    Haiku

    Look up to yourself
    Always move strong
    Never fall down.
    ©tanmay5

  • tanmay5 55w

    वीर

    वीर वो होते हैं,
    जो हार कभी मानते नहीं
    जीत कर भी
    रुकते नहीं वो
    मौज मनाने को,
    रात हो या
    दिन का सूरज,
    वायु हो
    या प्रचंड जल हो
    वो न रुकते
    इनके सामने
    आग की तरह से वो
    हर षण जलते ही रहते,

    वीर वो होते हैं
    जो हार कभी मानते नहीं।
    ©tanmay5

  • tanmay5 56w

    A new day

    Sun shining bright
    wind in full might
    trees flowering today
    It is a new day.

    Why are you sad
    why you livin in yesterday
    come to present
    as it is a new day.
    ©tanmay5

  • tanmay5 56w

    Fire (Haiku)

    Fire is your strength
    To rise in life
    Unleash it now....
    ©tanmay5