tapish_

तेरा एहसास ही मेरे अल्फ़ाज़ हैं

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  • tapish_ 15w

    मैं

    खुदा की नेमत नहीं, इबादत हूं मैं
    इसीलिए उनकी जरूरत नहीं आदत हूं मैं
    ©tapish_

  • tapish_ 16w

    स्वागतम

    भाई शकुन तो शुभ हैं इस साल के
    रचाए थे किस्से कितने बवाल के
    शामिल हैं फिर कहां थे अभी तक,
    बताएं गुरूजी हमारे जोहैं कमाल के
    ©tapish_

  • tapish_ 17w

    @amateur_skm ,@childauthor_345

    भाई सौरभ कहां हो coching बोलकर दोस्तों के साथ घूम रहे हो ���� घर आओ तुरंत ��

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    प्यारे भाई

    आ तेरे बिखरे बाल मैं संवार दूं
    नहीं जंचते हो शब्द मेरे
    किसी और से उधार लूं,
    नहीं सही जाती बदबू तेरी
    नहा ले अब तो कमबख्त
    वरना गालियां और दो चार दूं ।
    ©tapish_

  • tapish_ 17w

    हृदय

    हृदय विदीर्ण स्वयं आघात है
    करुण क्रंदन जीवनलय है
    उपेक्षित प्रेम मय है,
    सुखद स्वप्न में लिप्त है
    सुन प्रिया अब पास आ
    भोर की चुनर ओढ़ के,
    शीतल अग्नि बिखेर दे,
    जीत जाऊंगा, चाह में
    थक चुका हूं हर बार के प्रयास से।

  • tapish_ 17w

    क्योंकि

    हर रोज सोने से पहले
    तेरी नज्म की इक खुराक लेते हैं
    खुशियों में नशा अब आता नहीं
    गम हम बेहिसाब लेते हैं।
    ©tapish_

  • tapish_ 17w

    नामुमकिन

    मेरा अब होश में आना,मुझे लगता नहीं मुमकिन
    तुझे मैं भूल जाऊं यूं, मुझे लगता नहीं मुमकिन,
    मेरा जो हाले दिल है अब, उसको बताओ तो
    मेरा मरना नही मुमकिन,अब जीना नहीं मुमकिन।।
    ©tapish_

  • tapish_ 19w

    सुकून

    जाने लब्ज़ नाराज़ हैं मुझसे
    कोई गज़ल नही सुलझती है
    आज पर भीगे धागे कल के
    यादें उंगलियों से उलझती है
    वो वक्त प्यारा था पहचान छुपी थी
    खोने का न डर था पाने की खुशी थी
    झूठ की दुनियां कितनी हसी थी
    तुम तुम थे मगर मैं मैं नही थी
    अब अकेले में मुस्कुराती हूं
    सपने कल में सजाती हूं
    हर रोज तेरी वो ही कविता
    नई जैसी ही पढ़ती जाती हूं।
    ©tapish_

  • tapish_ 20w

    नया

    कुछ नया फिर कहूँगी मैं
    हां नए ख़्वाब बुनूंगी मैं
    रास नहीं आए जिंदगी को
    तस्वीर में वो रंग भरूंगी मैं
    ©tapish_

  • tapish_ 36w

    ज़िंदगी

    ज़िंदगी भी कैसी अजीब किताब हैं
    हर पन्ने पर लिखे नए हिसाब है
    सोचती हूं आज का पूरा हुआ
    मगर नए ख़्वाब उधार बेहिसाब हैं,

    ,
    ©tapish_

  • tapish_ 36w

    कल

    सुलझाती हूं धागों को कल के
    उलझन में उलझी जाती हूं कल के
    बीत जाता है कल मुझको बताए बिना
    फिर आ भी जाता है कल पूछे बिना
    ©tapish_