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  • u_and_me 15w

    ज़िंदगी में सुकून की तलाश है
    हाथ में बची अब सिर्फ हताश है

    ©u_and_me

  • u_and_me 16w

    मुझे मंज़ूर लाखों थप्पड़ अपने गाल पर तेरे हाथों के
    मगर तेरी खामोशी को मैं कभी मंज़ूर कर नहीं सकता

    ©u_and_me

  • u_and_me 16w

    Should we talk please

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    आज भी क्यों लगता है कि मेरी हर एक बार तुम्हें पता होनी चाहिए

    ©u_and_me

  • u_and_me 16w

    आधी रात में सोकर भी अधूरी नींद में उठ जाना
    आंखें बंद होते ही तेरा ख़्वाब में चले आना

    ©u_and_me

  • u_and_me 17w

    गहरी नींद में भी भर आती है आंखें
    दुआ करता हूं मुझे अब उठाए ना कोई

    ©u_and_me

  • u_and_me 17w

    ज़रूरी

    आज सोचने बैठा तो सोचने लगा कि
    ज़रूरी क्या है ?
    जब पिताश्री नशे में मां को चप्पल से मारते थे तब चुप चाप चादर में मुंह छिपाए सहम जाता था तो डर से बिना आवाज़ किए रो देता था तो रोना ज़रूरी हुआ
    जब टीवी पर सा रे गा मा या DID देखता तो वैसा मुकाम चाह कर भी हासिल ना कर पाने से मायूस होकर अपनी ही किस्मत को कोसकर रो देता था तो रोना ज़रूरी हुआ
    जब छत से पड़ोस के बच्चों को खेलता देखकर उनके साथ खेलना चाहकर भी घर से बाहर कदम रखने की इजाजत नहीं मिलती थी तो गुस्सा में रो देता था तो रोना ज़रूरी हुआ
    जब स्कूल में सभी बच्चे मिलकर छेड़ते मारते तंग करते तो परेशान आकर दर्द से चिल्ला कर रो देता था तो रोना ज़रूरी हुआ
    वैसे तो पिताश्री की कभी याद नहीं आई लेकिन दादी की याद आती है तो उनके साथ के पलों को याद कर रो देता हूं तो रोना ज़रूरी हुआ
    जब भी रोया अकेला रोया लेकिन एक दिन मेरे साथ भी कोई रोया
    उस दिन दिन नहीं रात थी
    सबसे खूबसूरत रात !
    उसके बाद मैं खुद के होने पर रोया
    फिर उसके खोने पर रोया
    रात को सोने पर रोया
    सुबह उठने पर रोया
    खाना खाने पर रोया
    पानी पीने पर रोया
    रोतडू
    ©u_and_me

  • u_and_me 18w

    I don't know really why ?
    But "Hi" !

    बेशरम, बत्तमीज, बद दिमाग नहीं हूं
    बस फर्क इतना है मैं खास नहीं हूं

    लगभग 1 साल 7 महीने हुए जब मेरी ज़िंदगी में भूचाल आना शुरू हुआ
    फिर क्या होना था बस एक एक करके
    कुछ को मैंने दूर कर दिया
    कुछ खुद मेरे से दूर हो गए
    और कुछ अब क्या कुछ अब कुछ भी नहीं बचा कुछ के लिए भी
    सच कहूं तो मुझे थोड़ा भी फर्क नहीं पड़ा जब मेरा नाम खराब हुआ
    थोड़ा भी फर्क नहीं पड़ा जब मेरा घर मेरा शहर छूट गया
    थोड़ा भी फर्क नहीं पड़ा जब दोस्त रिश्तेदार सब पराए हो गए
    सच कहूं तो फर्क तेरे जाने का भी नहीं पड़ा
    लेकिन आज तक इस कश्मकश में हूं कि फर्क इसीलिए नहीं पड़ा की जो आया ही ना हो तो जाने का क्या मलाल
    लेकिन ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि दर्द और दुःख के बीच के अंतर को समझता हूं शायद मैं
    तो फर्क इसीलिए नहीं पड़ा क्योंकि जो मेरा था वो मेरा है और रहेगा और ऐसा न हुआ तो वो मेरा था ही नहीं जो सच है ही नहीं
    खुद को फुसलाकर खुशी मिलती है तो अच्छा है ना
    पहले लगता था खुदा भगवान ये सब बकवास है practical ही नहीं है
    लेकिन ... ये लेकिन ऐसे ही रहने देते हैं
    तुमसे बात करने से ज्यादा तुमको सुनने का मन करता है
    I want to eat your gussa in my breakfast lunch and dinner too
    अब तो व्रतों पर चल रहा है जीवन ऐसा प्रतीत होता है
    क्या कहूं मैं
    मैं तो बस वहीं हूं जहां था
    तेरे इंतज़ार में !

    ©u_and_me

  • u_and_me 20w

    अगर

    एक लम्बे अर्ज़े बाद कभी कोई पास बैठेगा
    उतारकर चश्मा मेरा मेरी आंख में झांकेगा
    फिर चेहरा उदास करके मुझसे बात करेगा
    देखना तेरे बारे में ही वो पहला सवाल करेगा
    वो पूछेगा तुमने अपनी ज़िंदगी को जिया क्या है
    सच बताओ अपने ख़्वाब के लिए किया क्या है
    टूटे ख़्वाब के मंज़र के पास कब तक रहोगे
    अब क्या ज़िंदगी भर यूंही उदास रहोगे
    कितना आसान होता है ना सवाल करना
    ख़्वाब
    तेरे बाद अपनी दुनिया में कभी रहा भी तो नहीं
    ख़्वाब पूरा ना हो इसकी वजह थी भी तो नहीं
    माना तेरे पास ना सही पर इतनी दूर भी तो नहीं था
    ख़्वाब टूटा तो क्या करूंगा ये सोचा भी तो नहीं था
    हां मुझे गुस्सा आया जब मुझे आसमां से जमीं पर उतारा गया
    मैं फूट फुटकर रोया जब मेरी जगह किसी और का नाम पुकारा गया
    लेकिन
    मैं उसके हाथ से अपना चश्मा ले लूंगा
    उसके सवाल का कोई जवाब नहीं दूंगा

    ©u_and_me

  • u_and_me 21w

    एक बात कहूं
    मैं वक्त संभाल कर रखूंगा
    और जिस दिन तुम आओगी
    सब तुम पर ज़ाया कर दूंगा

    ©u_and_me

  • u_and_me 21w

    वक्त का फेर बदल फिर शुरू
    तकरीबन एक साल से ज्यादा

    जल्द शामिल हो रहा हूं वक्त की दौड़ में
    रेत सा फिसला तो ना लौट पाऊंगा

    ©u_and_me