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Reposts
  • vasudhagoyal 20w

    कुछ तीख़ा कुछ मीठा कुछ औषधि सरीखा
    तजुर्बों से ही ज़िन्दगी जीने का हुनर सीखा
    ©vasudhagoyal

  • vasudhagoyal 26w

    ख़ुमारी तेरे इश्क़ की अब उतरती नहीं
    तुम्हें देखे बिना जिन्दगी संवरती नहीं

    ज़िक्र तेरा मेरी हर ग़ज़ल में आ ही जाता है
    धड़कनें दिल से दूर रह कर धड़कती नहीं

    बिखरी पड़ी है चाँदनी हरसू फ़लक पर
    ज़ेहन से तेरी सूरत अब दरकती नहीं

    तन्हां दिल के साथ छोड़ दो अब मुझे
    फरिश्तों को यह मोहब्बत परखती नहीं

    बेचैनी अपनी बयां करना अब फ़िज़ूल हैं
    अल्फ़ाज़ मेरे यह दुनिया समझती नहीं
    ©vasudhagoyal

  • vasudhagoyal 26w

    सूनी हुई बगिया
    बेरंग है फिजाएं
    उड़ गई गोरैया पेड़ो से
    कौन रौनक लौटाएं

    तितली भी ढूंढती पुष्प
    पराग रस कहां से पाएं
    कंक्रीट के इस जंगल में
    अपना वजूद कैसे बचाएं

    प्रकृति का किया नाश
    अब काहे को पछताएं
    समय रहते भापां नहीं
    अब कौन तुम्हें बचाएं
    ©vasudhagoyal

  • vasudhagoyal 27w

    ढ़लती उम्र में समझ आया जीने का हुनर
    अनजानी राहें मिली अनजाना मेरा सफ़र
    बढ़ाते चले गए कदम आगे ही आगे निडर
    अंधेरी शब के बाद होने लगी है नई सहर
    ©vasudhagoyal

  • vasudhagoyal 28w

    जीवन के इस कुरुक्षेत्र में,चलता रहता अंतर्द्वंद
    तन को भाये राह मोह की,मन चलता माया संग
    विष जीवन का पीते-पीते,नीले पड़ गये सारे अंग
    निर्वाण ही ठहराव जीवन का,खत्म कर सारी जंग
    ©vasudhagoyal

  • vasudhagoyal 29w

    माना की फैली निराशा,घिरा अंधकार है
    चारों तरफ मचा कोरोना का हाहाकार है
    वायरस ने बदला अपना आकार है
    जो भी किसी से मिला हुआ बीमार है
    मौतें रुकती नहीं प्रशासन बेकार है
    लूट खसोट मची मानवता हुई शर्मसार है
    राजनीति करते नेता उनपर धिक्कार है
    जाने किस बात का उनको अहंकार है
    फिर भी धीरे-धीरे यह कहर थम जायेगा
    हटा कर काले बादल सूरज जगमगायेगा
    सूनी चमन की क्यारियाँ खिल जायेगी
    खत्म होगा पतझड़ बहारें लौट आयेगी
    विश्वास है हमें अमन चैन चारों ओर फैलेगा
    एक बार फिर मानुष,मानुष से गले मिलेगा
    ©vasudhagoyal

  • vasudhagoyal 32w

    इस महामारी ने भयानक रूप किया धारण
    कौन बचेगा कौन नहीं कोई नहीं जानता
    सब तरह से रहें तैयार

    ©vasudhagoyal

  • vasudhagoyal 33w

    दर्द भी दिया दवा भी बने
    अकेली रातों के गवाह भी बने
    ख़ामोशी की जुबां भी बने
    जिन्दगी समेट कर बहे अल्फ़ाज़ मेरे
    ©vasudhagoyal

  • vasudhagoyal 34w

    ये कहावत आज भी सटीक है

    "अंधेरी नगरी चौपट राजा"

  • vasudhagoyal 34w

    क्षण-भंगुर से इस जीवन की
    तृष्णा कभी पूरी ना होती
    ढूंढते रहते हो तुम जिसे बाहर
    कस्तूरी तो अपने ही अंदर होती
    ©vasudhagoyal