vickyprashant_srivastava

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Reposts
  • vickyprashant_srivastava 10w

    खूबसूरती..

    मेरे सफर में एक पड़ाव सी है
    वो लड़की बहती नाव सी है।।
    जो लहरों से भी टकरा जाए
    जो समंदर लांघ भी जाये
    जो हारे न कभी किसी के आने से
    गहराईयां सागर की जो नाप कर आये
    वो कभी धूप तो कभी छांव सी है
    मेरे सफर में एक पडाव...वो लड़की बहती....
    कोई मौसम सुहाना है वो
    एक गीत थोड़ा पुराना है वो
    शांत जल की नदी में तो
    वो चलती ही जाती पतवार सी है।
    वो मेरे सब सवालों के जवाब सी है।।
    मेरे सफर में एक पडाव...वो लड़की बहती....
    बड़ी खुबसूरत सी आँखे हैं उसकी
    कई खेल आखों से खेलती है वो
    क्यों देता है खुदा इतनी अदाएं लड़कियों को
    उफ्फ्फ ख़ूबसूरती उसकी वाकई बवाल सी है।
    ©vickyprashant_srivastava

  • vickyprashant_srivastava 11w

    कुछ..

    इन जुल्फों में बहकूँ या फिर बालियों में अटक जाऊं
    क्या देखूं ताजमहल, अब बस तुझे निगाहों में भर लूँ।
    ©vickyprashant_srivastava

  • vickyprashant_srivastava 29w

    Happy Birthday VIRAJ (guftgu)

  • vickyprashant_srivastava 39w

    बैरागी

    रिश्तों की रहगुजर से बड़ी दूर आ गया
    तेरा पता मैं ढूंढता खुद को भुला गया
    रिश्तों की रहगुजर से बड़ी....
    कह कह के मुझको याद दिलाती रही सबा
    तू लौट के न आया मैं वही पर खड़ा रहा।
    तेरा पता मैं ढूंढता खुद...
    छट गयी बदलियाँ,चाँद तारों की भीड़ है
    तेरी तलाश में मैं अंधेरों से छला गया।
    रिश्तों की रहगुजर से बड़ी....
    चल चल के थक गया है,उम्मीद चाहिए
    टूटा है कोई जब भी वो माँ के घर गया।
    तेरा पता मैं ढूंढता खुद...
    रोने से लौट आती गर खुशियां गयी हुई
    तेरे दर पे आके मैंने क्यूं न दरिया बहा दिया।
    रिश्तों की रहगुजर से बड़ी....
    ©vickyprashant_srivastava

  • vickyprashant_srivastava 56w

    ऐसे ही कुछ फूल आज भी मेरी किताब में हैं जो सूख तो गए हैं फिर भी उनमें उसकी जुल्फों की महक है, उसकी पंखुड़ियों की छुवन आज भी उतनी ही कोमल है जैसे पार्क में बैठकर मैं घंटो तक मैं तुम्हारे गालों से खेलता था।
    रंगत आज भी कुछ कुछ सुर्ख सी है छूकर लगता है मानो तुम्हारे होठों को छू लिया हो, तुमने गोया सरमा कर अपनी आंखें बंद कर ली हों और खुद को मेरे आगोश में छोड़ दिया हो मानो कि मैं तुम्हारी हूं और तुमसे जादा क्या ही कोई इनको रूह बख्शेगा।
    हां अगर तुम्हें दिख पाता तो दिखाता कि इन सूखे फ़ूलों का रंग कुछ बदल तो गया है लेकिन ये बिल्कुल तुम्हारे जैसा ही है तुम्हारे पल पल बदलते रंग जैसा कभी हँसता मुस्कुराता हुआ गुलाबी सा कभी मुझसे नाराजगी में सुर्ख सा कभी गुमसुम अंधेरो जैसा जब मेरे पास तुम्हारे सवालों का जवाब नही होता और एक पल में सफेद तन्हा उस चांद सा गुमसुम जो मेरे जाने भर की बात से तुम्हारे चेहरे पर छा जाती थी।
    उसकी टहनियों के कुछ निशान बड़े करीने से किताब के पन्नो पे हैं जैसे किसी सुंदर सी आयत से उभरे हुए, लगता है मानों मैंने मैंने तुम्हारे कोमल हाथों को प्यार से पकड़ा हो और छुड़ाते हुए अठखेलियों में सख्ती के कुछ निशां उभर आये हों, और उसकी नाराजगी में रुठ जाने की तुम्हारी अदावटें सिलवटों जैसे सफेद पन्नो पर श्याह रंगों में निखर आयी हो।
    वो फूल सायद 10 साल हो गए लेकिन पता है मैंने आज भी उसको महकता हुआ रखा है मैने उन्हें संभाल रखा है, तुम्हारे कल्पनाओं की महक से तुंहरी यादों की खुशबू से , तुम्हारे मन की सुंदरता से तुंहरी हसी से और तुम्हारी एक उम्मीद में.....
    #mirakee @guftgu @neha_netra
    @leeza18 @mirakee

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    कुछ लिखा है..

    ©vickyprashant_srivastava

  • vickyprashant_srivastava 57w

    Bahut दिनों कुछ लिखा है आज mirakee पे।
    @rani_shri @neha_netra @piu_writes @vishalprabtani @leeza18 @guftgu @rahat_samrat @prachands @smi_vaid

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    फिर बारिश आयी

    बरसात और तुम दोनों एक ही कश्ती के मुसाफिर थे
    या तो न आना ही फितरत थी या
    मुझे सताने में दोनों ही माहिर थे, तुम और बरसात दोनों एक ही कश्ती के मुसाफिर थे।।
    वो मुहब्बत वो उल्फत ये बात है उन दिनों की
    कुछ हुआ या होते होते रह गया
    एहसासों को दबाने में दोनों ही माहिर थे,तुम और बरसात.....
    तुमने मांगे न होते अगर वो तोहफे सारे
    चैट के दौर में भेजे वो सब खत तुम्हारे
    एहसासों की नमी जो खत पे थी
    तुम्हारे शब्द जो एहसास थे उन दिनों के
    वो तसवीरें जो आज भी यूही सलामत रखी है मैंने
    लौटा तो न पाऊंगा ये मेरे जीने के सहारे
    तुम और बरसात लगता है दोनों एक ही ...faza
    ©vickyprashant_srivastava

  • vickyprashant_srivastava 97w

    .

    ©vickyprashant_srivastava

  • vickyprashant_srivastava 98w

    By unknown writer

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  • vickyprashant_srivastava 99w

    ईद हो जाये

    मेरा चाँद हो तुम बस दीदार हो जाये
    तुम दिखो और दिल बेकरार हो जाये
    ईद हो चाँद हो और मेरी मुरादें हों सब
    रब करे तुमको मुझसे प्यार हो जाये।
    ©vickyprashant_srivastava

  • vickyprashant_srivastava 101w

    4 lines

    अभी कुछ फासला सा लगता है.../दरम्यां अपने कोई चला गया सा लगता है/तुम थोड़ा ठहर के देखो तो मुझमें/कब से मैने आंखो को जगा रखा है/तुमने गुजरे हुए लम्हों को सजोया तो न होगा/एक तू ही तो मुझे अब अपना सा लगता है।।faza
    ©vickyprashant_srivastava