word_of_sorrow

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qalam ki baat harf-e-gam ke sath!

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  • word_of_sorrow 122w

    वो मनमर्ज़ी अपनी यूँ ही करती रही
    कसूरवार हम ही फ़िर होते क्यों रहे
    वो शौक़ से शौक़ अपने पुरे करते गये
    और हम बा'द याद कर रोते क्यों रहे

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  • word_of_sorrow 122w

    मय्यसर क्यों इक दर्द निचोड़ता रहा सीने को
    मुसलसल ये याद किस की तड़पाएँ जीने को

    ©_word_of_sorrow_

  • word_of_sorrow 122w

    ये रूह भटक रही, मटक रही देख ले कब्रिस्तान में
    प्यासी रूह दीदार-ए-इश़्क की, उज़डे रेगिस्तान में

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  • word_of_sorrow 122w

    बदल दे फ़िर बद'किस्मती लिखी बा'द जो तुमने
    तोड़ दे क़फ़स क़ैद रूह की दिखी बा'द जो तुमने

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  • word_of_sorrow 122w

    ज़िस्म कि करूँ या इस रुह की करूँ
    दिल कि करूँ या दिमाग़ की करूँ
    बा'द तेरे हम-दर्द मिरे तु ही बता अब
    तौहिन करूँ भी तो किस की करूँ

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  • word_of_sorrow 122w

    हम-नफ़स ही दगाबाज़ निकला शोर क्या करें
    हम-नफ़स ही था उसपे अब हम ज़ोर क्या करें

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  • word_of_sorrow 122w

    दबा दिया दबाव से, सर उठाने की बात करते
    बहा दिया सब यहाँ तो, जुटाने की बात करते

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  • word_of_sorrow 122w

    ‌याद कहाँ हूँ जो, मेरा वो ख़्याल करते
    कौन यहाँ हूँ जो, मुझे नि-हाल करते

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  • word_of_sorrow 122w

    फ़लसफ़ा तो इतना था तिरा, नसीब तिरा ना था
    था जो हम-नफ़स यहाँ तिरा, करीब तिरा ना था

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  • word_of_sorrow 122w

    चलकर लहर बन मिलूँ मैं
    बहकर चमन बन खिलूँ मै

    ©_word_of_sorrow_