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  • yenksingh 147w

    #mirakee @mirakee has deactivated many hindi writers account like @laughing_soul and sanjeevshukla etc. I think it's ill motivated.I know them and their writing. May be my account also will be deactivated after this.But it's time to stand against ill motive, injustice and hatred against mother India.
    May we decide to switch collectively to other platform, if justice not done.
    Instagram #yenksingh
    ©yenksingh

  • yenksingh 147w

    असंगत

    अपने ही कंधों पर
    मैं, अपने वजूद की
    लाश ढो रहा हूँ
    बिलख, बेजान मरुभूमि में
    कहीं खो रहा हूँ
    रेत है, ऊसर है
    असंगत-सा
    कुछ बीज बो रहा हूँ
    बस ऐसे ही,
    निरुद्देश्य घूम रहा हूँ
    और, अपने आप
    अपना मुख चूम रहा हूँ।
    -©नवल किशोर सिंह
    31-08-2019
    ©yenksingh

  • yenksingh 147w

    सखापना
    सर्दी से किटकिट दाँत
    करते है शोर घना
    संशय से देखते जैसे
    चुप चबाते हो चना
    अरे, वो बात तब की
    जब थी
    कृष्ण-सुदामा सखापना
    आज तो,
    चना लेकर ही भाग चले 
    और,
    मीत लटकते रह गए 
    पकड़कर तना
    -©नवल किशोर सिंह
    ©yenksingh

  • yenksingh 147w

    काजल-हाइकु
    1
    श्वेत वसन
    काजल की कोठरी
    निर्मल तन

    2
    लुप्त सितारे
    अमावस की रात
    काजल-नीर 

    3
    पनारे रैन
    कंटक सुख चैन
    काजल-रैन

    -©नवल किशोर सिंह

       30-08-2019
    ©yenksingh

  • yenksingh 148w

    रजनी
    मादक नयनों में भरे प्रतीक्षा
    धैर्य, धधक की पूर्ण परीक्षा
    अकुलाया पल, बीता दिनमान
    साँझ सनेही का है प्रतिदान
    श्याम वसन रंग आई रजनी
    शोख कजरों में खिली सजनी
    सरस शशि शोभित नील थाल
    बिंदुली विभूषित ज्यों हो भाल
    बेल बूटे बहुल चूनर चटकारे
    जगमग नभ है लिए सितारे
    प्रीति प्रतीति मधु आँखें मुँदें
    ओस के कण मृदु रस की बूंदें
    कोलाहल के तज कटुक याम
    सुखकर स्वपन-लोक ललाम
    शिथिल, श्रांति सिंचित सिंगार
    सौरभसिक्त नव-जीवन संचार
    -©नवल किशोर सिंह
    15-07-2019
    ©yenksingh

  • yenksingh 149w

    छलिया
    छवि सुरभित मनहारिणी, मुरली की मधु तान ।
    नट नटखट बेकल करे, अधर मधुर मुस्कान ।
    नैन भींच खींचि आवे, सुध बुध मन बिसराय
    छन-छन छलिया छल करे , होवत कबहुँ न भान।
    ***** *****
    रैन बैन बेचैन हिय, हलक रुष्ट हलकान ।
    कुम्हलत जात गोपियाँ, मोहन बिन निष्प्राण।
    अति बैरी विरह छलिया, पीर नीर बरसाय
    ताप तरश हर ले पिया, मिलन मोद वरदान ।
    -©नवल किशोर सिंह
    14-08-2019
    ©yenksingh

  • yenksingh 149w

    जलप्रलय
    इंद्र का कोप या वरुण निरुपाय
    धरा धसक जीव जन असहाय
    सागर सहन मिलकर एकाकार
    धरा पर पसरा करुण हाहाकार
    मैया, गैया दीन दैया की पुकार
    आर्त्तनाद-त्राहि माम् मंत्रोच्चार
    जल प्रलय हा! तोड़ रही साँसें
    जल माला में बहती जिंदा लाशें
    -©नवल किशोर सिंह
    12-08-2019
    ©yenksingh

  • yenksingh 150w

    चितचोर
    बैठहि डार कदंब पर , वो यमुना की कोर ।
    प्रीत चुनरिया ले उड़े , नटखट नंद किशोर।
    तुनकत तमकत गोपियाँ , कबहि करत अरदास ,
    उपालंभ कैसे करे , वो चंचल चितचोर । ।  
    *****
    मुरली मधुर बजाय के, खिंचहि अपनी ओर ।
    धावत आवत गोपिका ,धरि आँचल का छोर ।
    हुलषत मानिनि राधिका, दूर खड़ी मुसकाय ,
    विकल मुरारि ताक रहे, वो चितवन चितचोर।।
    -©नवल किशोर सिंह
       19-07-2019
    ©yenksingh

  • yenksingh 151w

    पथिक

    पथिक हूँ, पथगामी से सदा सीखता हूँ
    मन के भावों को यदाकदा लिखता हूँ
    गतिशील चरण, शनैःशनैः चल रहा है
    हर कदम पर, मंज़िल को छल रहा है
    वक़्त का घाव, दुर्भाव, अभी भरा नहीं
    जमीर भी जाहिल है, अभी मरा नहीं
    जिन्दगी जंग-सी, नित जद्दोजहद है
    पराग हीन मधुछत्ते में शुष्क शहद है
    कथ्य नेपथ्य में बाध्य कोलाहल लिये
    पग-पग रग अभग छल हलाहल पिये
    अंतः-क्लेश, पलकें निर्निमेष, चीखता है
    भय-विष्मय निर्बोध विवश विलखता है
    हाशिये पर लगे चिन्ह सा, कद गौण है
    वाणी अज्ञानी, घिघियानी भ्रमद मौन है
    शब्द-समिधा-शेष संग कभी दिखता हूँ
    कलम हाथ में है, यदाकदा लिखता हूँ
    -©नवल किशोर सिंह
      25-07-2019
    ©yenksingh

  • yenksingh 151w

    #Picturechallenge
    @100urav_indori


    पिंजरे में कैद या हिम्मत का दिवाला है।
    भाग्य का दोष या अक्ल पर ताला है।।
    ©yenksingh

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    .
    ©yenksingh