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Reposts
  • ziyasingh 74w

    राज़ ही रहने दो

    हर राज़ जो जुड़ा है तुमसे,
    उसे एक राज़ ही रहने दो।
    जो रिश्ते उलझ गए हैं,
    उनमें जो गांठ है वो रहने दो।
    बड़ी मुश्किल से संभाला है खुद को ,
    अब जो रिश्ता बचा है
    उसकी लाज तो रहने दो ।
    Shwetasingh
    ©ziyasingh

  • ziyasingh 76w



    जिंदगी एक किताब हैं
    एक ऐसी किताब....
    जिसके हर एक पन्ने पर
    एक नई दास्तां लिखीं हैं !! ✒️

    Shwetasingh
    ©ziyasingh

  • ziyasingh 84w

    ❣️

    हजारों रंगों से रंगी-सी
    महफ़िल में सजी-सी,
    किसी दाद की मुरीद ना...
    खुद में यूं रही-सी ‌।
    हर पल में घुली-सी,
    किसी रचना की जरूरत नहीं...
    खुद में यूं रची-सी‌ ।
    बागो में फूल महकार-सी
    कलीयो में बहार-सी,
    किसी बारिश की मोहताज नहीं..
    खुद में यूं बाहार-सी ।
    बिन कहे अल्फाज़-सी
    ज़हन में उठें जज़्बात-सी,
    किसी इश्क की आदी नहीं..
    खुद में यूं इश्कबाज़-सी ।
    Shwetasingh
    ©ziyasingh

  • ziyasingh 88w

    वो वक़्त

    वक्त की एक धुंधली तस्वीर से
    हो गए हो तुम आज कल..
    एक वक्त वो भी था
    जब हमारी सुबह तुम पर शुरू
    और शामे तेरे ख्यालों में खोई होती थी,
    आज वक्त का तकाज़ा कुछ है
    ना वो तुम हो, ना हम,
    ना वो सुनेहरी सुबह हैं,
    ना वो चमकीली सी रात .....
    वो बातों में अब वो मिठास नहीं रही
    जिसके रस में रूहें डूब जाया करती थी,
    आज अचानक यूं ही कहीं
    टकरा जाने पर भी..
    ख़ामोशी से अनजान नज़रों से
    गुजर जाया करते हैं...."

    Shweta singh
    ©ziyasingh

  • ziyasingh 91w

    ❤️❤️

    Kya janna cahte ho..??
    Dil ki tadap..."
    Aakho ki nami.."
    Hotho ki shisk.."
    Roh hi becheni.."
    Ya...
    Ishq ka pagalpan !!
    Shweta Singh
    ©ziyasingh

  • ziyasingh 97w

    डर से

    जब एक छोटी बच्ची
    खेल रही होती हैं आंगन में
    किसी अंजान के आने पर
    डर जाती हैं आखिर वो क्यों।
    छुप जाती हैं जाकर वो
    माँ के आंचल में
    सुरक्षा की सारी सीमाएं जहां
    होती है समाप्त बस... वहीं से शुरू होता है
    वो आंचल जहां वो डर के नहीं
    सुकून से सांस लेती हैं ।
    डरती है वो उस साए से
    जिसके कदम उसकी ओर बढ़ते हैं
    उस फूल सी कोमल बच्ची पर
    उसके हाथ जंजीर से तपते हैं।
    हैवानियत बढ़ती जाती है
    ऐसे फूल मिटते हैं
    फिर अक्सर कहते हैं लोग ये
    कि क्यूं ये औरों से कटती रहतीं हैं।
    जो नहीं जानते बातें ये
    वो बेबाकी से कहा ये करते हैं
    अरे लड़की है जाने दो
    ये ऐसे ही अच्छी लगती हैं।
    वो सारी उम्र सोचती हैं कि
    क्या गुनाह हैं मेरा लड़की होना
    मैं तो सृष्टि निर्माण के लिए बनीं थी
    क्या मेरी रचना है बस एक खिलौना।
    मेरा अस्तित्व क्या बस
    एक पुरुष तक ही सीमित है
    क्या मुझे नहीं है जीने का अधिकार
    क्यों एक साए के डर से
    छोड़ दूं मैं ये संसार..!!
    Shwetasingh
    ©ziyasingh

  • ziyasingh 99w

    "वो ज़माना कोई और था...
    जहां हीर रांझा का
    शोर था.... "!!

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    Shwetasingh
    ©ziyasingh

  • ziyasingh 100w



    जो .
    इश्क तुम्हारा..
    वहम हमारा था...
    दिल जुड़ा था मानो....
    कुछ ऐसा लगा था बेचारा.....
    तेरे साथ वहम भी गुजर गया......
    अब ये खुश हैं अकेला ही बेसाहारा.......
    Shwetasingh
    ©ziyasingh

  • ziyasingh 101w

    @mirakee @mirakeeworld @hindiwriters
    #Hindi poem's #loveforever #वक्त_वक्त_की_बात

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    वक्त वक्त की बात

    वक्त वक्त ki baat h....
    Kal thak ussay वक्त nhi tha...
    Aaj hame वक्त nhi h...

    Shwetasingh
    ©ziyasingh

  • ziyasingh 102w



    Apne रोशन-ए-आबाद़ me
    Hame बर्बाद-ऐ-मोहताज na Krna..

    Dekha kr चांद sii रौशनी ko
    जिंदगी ko andhiyar mat karna...

    Shwetasingh
    ©ziyasingh